राज्यपाल तक पहुंची शिकायत के बाद चेयरमैन ने खोला मोर्चा, बोले— “राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए संगठन का हो रहा इस्तेमाल”
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी)।एमसीबी जिले के स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर शुरू हुई जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अविनाश खरे पर लगे गंभीर आरोपों के बीच अब भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी भी दो खेमों में बंटती नजर आ रही है। एक ओर प्रदेश प्रतिनिधि एवं अधिवक्ता रामनरेश पटेल भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर राज्यपाल से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन शैलेश जैन खुलकर सीएमएचओ के समर्थन में उतर आए हैं।
चेयरमैन का बड़ा पलटवार।
चेयरमैन शैलेश जैन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि डॉ. खरे के खिलाफ लगाए गए आरोप पुराने हैं और उनकी जांच पहले ही हो चुकी है। उनका दावा है कि उस समय जांच स्वयं अधिवक्ता रामनरेश पटेल ने की थी और वे संतुष्ट भी थे। ऐसे में अब दोबारा उसी मुद्दे को उठाना संगठन की गरिमा के खिलाफ है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रेडक्रॉस जैसे सेवा संगठन का इस्तेमाल व्यक्तिगत और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए किया जा रहा है, जिससे संगठन की छवि धूमिल हो रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल…
यदि पूरा मामला पहले ही जांच में समाप्त हो चुका था तो फिर राज्यपाल को शिकायत क्यों भेजी गई?
यदि शिकायत में दम है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और यदि आरोप निराधार हैं तो स्वास्थ्य विभाग व शासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे?
यही सवाल अब जिले की जनता भी पूछ रही है।
भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किलें
सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे पर मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU), रेडक्रॉस गतिविधियों, स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं तथा अन्य प्रशासनिक मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगातार चर्चा में हैं। इन आरोपों को लेकर कई शिकायतें विभिन्न स्तरों पर भेजी गई हैं। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम जांच एजेंसी या शासन स्तर की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
18 अगस्त पर टिकी निगाहें।
सूत्रों के अनुसार अधिवक्ता रामनरेश पटेल ने 18 अगस्त को रायपुर स्थित रेडक्रॉस भवन के सामने बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है। यदि ऐसा होता है तो यह विवाद प्रदेश स्तर का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
अब फैसला जनता और सरकार के पाले में।
आरोप और प्रत्यारोप के बीच सबसे बड़ी जिम्मेदारी अब राज्य शासन की है। यदि आरोप सही हैं तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट कर विवाद समाप्त किया जाना चाहिए।फिलहाल इतना तय है कि एमसीबी के स्वास्थ्य विभाग में उठी भ्रष्टाचार की चिंगारी अब रेडक्रॉस के भीतर ‘महाभारत’ का रूप ले चुकी है और आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी परीक्षा बन सकता है।
नोट सिर्फ आपके लिए👉 इस समाचार में उल्लिखित भ्रष्टाचार संबंधी आरोप विभिन्न पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम न्यायिक या जांच एजेंसी द्वारा अंतिम रूप से नहीं हुई है। संबंधित पक्षों के दावों को भी समाचार में शामिल किया गया है।




