रायपुर/मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर।सच की लड़ाई लड़ने में गुलाब कमरों का कोई जवाब नहीं। जिस मुद्दे को लगातार उठाया गया, जिस पर सवाल पूछे गए और जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई, आखिरकार उस मामले में शासन की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि आरोप केवल राजनीतिक शोर नहीं थे, बल्कि जांच में तथ्यों की पुष्टि हुई।
‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ जैसी संवेदनशील योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मान के साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत कराना है। लेकिन जब इसी योजना में नवविवाहिताओं को सोने के बजाय ‘गिलेट’ धातु के मंगलसूत्र दिए जाने की शिकायत सामने आती है, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि गरीब बेटियों के सम्मान के साथ किया गया गंभीर खिलवाड़ भी माना जाएगा।अब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा की दो वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया है। साथ ही इस दंड की प्रविष्टि सेवा पुस्तिका में दर्ज किए जाने का निर्णय भी लिया गया है। इससे स्पष्ट है कि शासन ने विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय की है।
लेकिन इस कार्रवाई के साथ कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े होते हैं
– यदि जांच में गड़बड़ी सिद्ध हुई, तो केवल विभागीय दंड ही क्यों?
– घटिया सामग्री की खरीद किस एजेंसी या सप्लायर से हुई और उसकी जिम्मेदारी किसकी है?
– क्या सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आर्थिक व आपराधिक जवाबदेही भी तय होगी?
– भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था बनाई जाएगी?
लोकतंत्र में मीडिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सत्ता का विरोध करना नहीं, बल्कि सच को सामने लाना है। यदि पत्रकारिता तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर सवाल उठाती है और उसके बाद शासन कार्रवाई करता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का संकेत है।यह मामला केवल एक अधिकारी के दंड का नहीं, बल्कि उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए चेतावनी है जो सरकारी योजनाओं को निजी लाभ का माध्यम समझते हैं। गरीबों के अधिकारों पर डाका डालने वालों को यह संदेश मिलना चाहिए कि देर भले हो, लेकिन जवाबदेही तय होगी।
अब जनता की नजर अगले कदम पर है। क्या केवल वेतनवृद्धि रोकने तक मामला सीमित रहेगा, या पूरे खरीद प्रक्रिया, संबंधित सप्लायर और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी? यदि ऐसा नहीं हुआ, तो कार्रवाई अधूरी मानी जाएगी।
गरीब बेटियों का सम्मान किसी भी सरकारी योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य है। उस सम्मान के साथ समझौता करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई ही वास्तविक न्याय कहलाएगी।




