प्रदीप पाटकर।छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) इन दिनों अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य महकमे में मचे ‘महा-संग्राम’ के लिए सुर्खियों में है। कहते हैं कि डॉक्टर का काम बीमारी को जड़ से खत्म करना होता है, लेकिन जब जिले के मुखिया यानी सीएमएचओ (CMHO) डॉ. अविनाश खरे साहब पर ही भ्रष्टाचार और भर्राशाही के गंभीर आरोपों का ‘इलाज’ कराने की नौबत आ जाए, तो समझ लीजिए कि पूरी व्यवस्था ही वेंटिलेटर पर है!अधिवक्ता और रेडक्रॉस सोसायटी के प्रदेश प्रतिनिधि रामनरेश पटेल ने महामहिम राज्यपाल को जो शिकायती पत्र भेजा है, उसने जिले के स्वास्थ्य विभाग का ऐसा ‘एक्स-रे’ कर दिया है कि भीतर के सारे काले धब्बे साफ नजर आने लगे हैं। आइए, जरा इस खबर में लगे ‘मिर्च-मसाले’ और इसके पीछे के तीखे सच को परत-दर-परत समझते हैं।
कागजों पर दौड़ी एम्बुलेंस, पी गई लाखों का ‘डीजल’!
आरोप का तीखापन यह अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है कि जिस मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) को हरी झंडी अगस्त 2025 में दिखाई गई, जिसके डॉक्टर जुलाई में आए और नर्स सितंबर में… वो गाड़ी डॉ. खरे की जादुई फाइलों में मई 2025 से ही सरपट दौड़ रही थी!सच्चाई का तड़का जब स्टाफ ही नहीं था, तो क्या भूत मरीज देख रहे थे? या फिर कागजों पर ही किलोमीटर दौड़ाकर लाखों रुपये का डीजल ‘हजम’ कर लिया गया? ऊपर से एक ऐसे ‘फर्जी ऑपरेटर’ को 15 हजार रुपये महीना बांट दिया गया, जिसने कभी गाड़ी का स्टेयरिंग तक नहीं छुआ। इसे कहते हैं- आम के आम, गुठलियों के दाम!
खून का ‘सफेद धंधा’ और साहब का संरक्षण।

आरोप का तीखापन रक्तदान को महादान कहा जाता है, लेकिन आरोप है कि मनेन्द्रगढ़ का शोभा ब्लड बैंक इस पवित्र खून को ‘काले बाजार’ की भेंट चढ़ा रहा है।सच्चाई का तड़का आरोप गंभीर हैं कि समाजसेवियों और आम जनता से दान में लिए गए खून को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है और इस पूरे खेल को सीएमएचओ साहब का कथित ‘वरदहस्त’ प्राप्त है। पूर्व में शिकायतें हुईं, लेकिन साहब की फाइलें शायद ठंडे बस्ते से बाहर नहीं निकल पाईं। जब रखवाले ही आंखें मूंद लें, तो लुटेरों के हौसले बुलंद होना लाजिमी है।
एड्स जागरूकता में ‘बाहरी’ कलाकारों पर मेहरबानी।

एड्स जैसे गंभीर विषय पर जागरूकता के लिए सरकारी खजाना खोला गया, लेकिन आरोप है कि स्थानीय कलाकारों के पेट पर लात मारकर बाहरी ‘खास’ लोगों को उपकृत किया गया। थोड़ा-बहुत काम दिखाकर मोटी रकम का आहरण कर लिया गया। रेडक्रॉस के सदस्यों को भनक तक नहीं लगने दी गई। वाह साहब! ‘अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को दे।’
बदहाल व्यवस्था 6 घंटे तक नहीं मिली एम्बुलेंस, तड़पकर मर गई श्यामा बाई।
सच्चाई का सबसे कड़वा मोड़: भ्रष्टाचार की ये कहानियां तब और ज्यादा डरावनी हो जाती हैं जब किसी मासूम की जान पर बन आती है। 220 बिस्तर वाले मनेन्द्रगढ़ अस्पताल में लेदरी निवासी श्यामा बाई को आपातकालीन स्थिति में
घंटे तक एम्बुलेंस नहीं मिली और इलाज के अभाव में उन्होंने दम तोड़ दिया।
सवाल यह है कि जिस जिले का स्वास्थ्य महकमा वीआईपी गाड़ियों और कागजी एम्बुलेंसों के डीजल बिल पास करने में व्यस्त हो, वहां एक गरीब महिला को वक्त पर एम्बुलेंस कैसे नसीब होगी?इतना ही नहीं, जिन अधिकारियों (बीपीएम सुलेमान खान) को तत्कालीन कलेक्टर ने नियमों की धज्जियां उड़ाने पर बर्खास्त करने की सिफारिश की थी, उन्हें दोबारा मनेन्द्रगढ़ लाकर मलाईदार कुर्सी पर बैठा दिया गया। नियमों को ताक पर रखने का यह हुनर वाकई काबिले-तारीफ है!
सरकारी आवासों पर अपात्रों का ‘कब्जा’, अपनों को ‘नो एंट्री’।
चैनपुर स्थित स्वास्थ्य विभाग की आवासीय कॉलोनी में बिना किसी वैध आवंटन के ‘खास’ अपात्र लोगों को मोटी रकम के एवज में बसा दिया गया है। वहीं, विभाग के असली हकदार और नियमित कर्मचारी निजी मकानों का भारी किराया भरने को मजबूर हैं। शासन को दोहरा नुकसान- न तो रेंट मिल रहा है और न ही हाउस अलाउंस (HRA) कट रहा है।
अब आगे क्या? 18 अगस्त को रायपुर में ‘महा-दंगल’ की तैयारी!
अधिवक्ता रामनरेश पटेल ने प्रशासन और सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। यदि एक माह के भीतर डॉ. अविनाश खरे को पद से हटाकर निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो 18 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक रायपुर के रेडक्रॉस भवन के सामने उग्र अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू होगा।
टीप सिर्फ आपके लिए 👉ये आरोप सिर्फ एक अधिकारी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि एमसीबी जिले की पूरी चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था का आईना हैं। महामहिम राज्यपाल तक बात पहुंच चुकी है, रेडक्रॉस के आला अधिकारी भी लपेटे में हैं। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस ‘भ्रष्टाचार के कैंसर’ का ऑपरेशन समय रहते करता है, या फिर 18 अगस्त को राजधानी रायपुर की सड़कों पर इस मामले का तमाशा सरेआम बनेगा। डॉक्टर साहब पर लगे आरोपों की जांच तो होनी ही चाहिए, क्योंकि मामला जनता की सेहत और हक की कमाई का है।




