कोरिया/सरगुजा:जिले में फर्जी और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ प्रशासन द्वारा की जा रही सख्त कार्रवाई का जहाँ चौतरफा स्वागत हो रहा है, वहीं इस कार्रवाई की आड़ में डिग्रीधारी और पंजीकृत चिकित्सकों की छवि को धूमिल करने के प्रयासों का विरोध भी शुरू हो गया है। इसी कड़ी में आज भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ (जिला-कोरिया) के नेतृत्व में चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरगुजा कलेक्टर और जिला दण्डाधिकारी को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान मुख्य रूप से डॉ. भुवन भास्कर साहू (जिला संयोजक, चिकित्सा प्रकोष्ठ), डॉ. अमित कुमार पाण्डेय, डॉ. दीपक सोनी और डॉ. शुभम गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
फर्जी डॉक्टरों पर हो प्रहार, लेकिन ‘BAMS’ की साख पर न आए आंच
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि वे क्षेत्र में मरीजों की जान से खेलने वाले फर्जी डिग्री धारकों और बिना अनुमति के क्लिनिक चलाने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ प्रशासन की मुहिम का पूरी तरह समर्थन करते हैं। जनहित और मरीजों की सुरक्षा के लिए ऐसी कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहनी चाहिए।
चिंता का विषय: चिकित्सकों ने हाल ही में कुछ समाचार माध्यमों में आई खबरों पर कड़ी आपत्ति जताई, जहाँ एक फर्जी डॉक्टर के खिलाफ हुई कार्रवाई में सामान्य रूप से “BAMS डॉक्टर अवैध क्लिनिक चला रहे थे” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि वह आरोपी कोई पंजीकृत BAMS डॉक्टर नहीं बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर काम करने वाला जालसाज था। ऐसे में ‘BAMS’ शब्द का गलत इस्तेमाल करने से समाज में वर्षों से सेवा कर रहे योग्य और पंजीकृत आयुष चिकित्सकों की प्रतिष्ठा और पेशे की गरिमा को ठेस पहुँचती है।
BAMS डॉक्टरों को है प्राथमिक एलोपैथिक उपचार का कानूनी अधिकार
ज्ञापन के माध्यम से डॉक्टरों ने प्रशासन का ध्यान छत्तीसगढ़ शासन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अधिसूचना (क्रमांक 15-68/2017/नौ/55-तीन, दिनांक 11.02.2019) की ओर आकर्षित किया।
- कानूनी प्रावधान: छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम, 1970 के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत आयुष (BAMS) चिकित्सकों को अधिसूचना की अनुसूची में वर्णित एलोपैथिक औषधियों के उपयोग और प्राथमिक/आपातकालीन उपचार की वैधानिक अनुमति प्रदान की गई है।
- प्रशासन से मांग: निरीक्षण या किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान इस कानूनी अधिसूचना के प्रावधानों का पूरा पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी प्रामाणिक डॉक्टर को मानसिक रूप से प्रताड़ित न होना पड़े।
प्रमुख मांगें जिन पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है:
- फर्जी डॉक्टरों और फर्जी डिग्री धारकों के खिलाफ कठोर और निरंतर कार्रवाई जारी रखी जाए।
- विधिवत पंजीकृत BAMS चिकित्सकों की गरिमा, सामाजिक प्रतिष्ठा और उनके वैधानिक अधिकारों की पूरी रक्षा की जाए।
- मीडिया व प्रशासनिक स्तर पर तथ्य खंगालने के बाद ही सही और तथ्यात्मक जानकारी जारी की जाए, ताकि जनता का डॉक्टरों पर विश्वास बना रहे।
चिकित्सकों के इस सकारात्मक और सुधारात्मक कदम की नगर में काफी सराहना हो रही है। यह कदम न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने में मदद करेगा, बल्कि जमीन पर रहकर सेवा दे रहे असली कोरोना वॉरियर्स और चिकित्सकों के मनोबल को भी बढ़ाएगा।




