जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारी से की 12 दिनों का वेतन काटने और कड़ी कार्रवाई की मांग।
कोरिया (सोनहत)।सोनहत विकासखंड के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत कचोहर के शासकीय माध्यमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मंगलवार को जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के दौरान विद्यालय में पदस्थ प्रधान पाठक सहित तीन शिक्षक ड्यूटी से गायब मिले। क्षेत्र में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह पांचवीं बार है जब निरीक्षण में इन शिक्षकों को अनुपस्थित पाया गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित मिले शिक्षक:
- शिवशंकर कमलवंशी (प्रधान पाठक)
- सोम प्रभा सिदार (शिक्षिका)
- सुमन राठौर (शिक्षिका)
सप्ताह में सिर्फ 2-3 दिन ही आते हैं शिक्षक: ग्रामीण
निरीक्षण के समय विद्यालय में बड़ी संख्या में संकुल समन्वयक, सरपंच और ग्रामीणजन मौजूद थे। ग्रामीणों ने जिला पंचायत सदस्य के समक्ष अपनी व्यथा साझा करते हुए आरोप लगाया कि विद्यालय के शिक्षक सप्ताह में केवल दो से तीन दिन ही स्कूल आते हैं। नियमित उपस्थिति न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है और दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंचते, जबकि शासन से वेतन का पूरा लाभ उठा रहे हैं।
लापरवाह शिक्षकों पर गिरेगी गाज, 12 दिन का वेतन काटने की मांग
शिक्षकों की इस घोर लापरवाही और कार्यशैली पर जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मौके से ही जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से संपर्क कर मांग की है कि कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले इन तीनों शिक्षकों का चालू माह का 12 दिनों का वेतन काटा जाए तथा शेष वेतन ही जारी किया जाए।
“दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि शिक्षक इसी तरह लगातार गायब रहेंगे, तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा? विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कठोर दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।”
— सुरेश सिंह, जिला पंचायत सदस्य
कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश
जिला पंचायत सदस्य ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि संबंधित शिक्षकों को तत्काल कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षकों की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार विधिसम्मत और निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।




