बड़ी कार्रवाई: चरचा का पंचवटी रेस्ट हाउस बना जांच का वार-रूम, स्थानीय पुलिस की केस डायरी और सबूतों को CBI ने लिया अपने कब्जे में।
विशेष ब्यूरो, कोरिया (सोनहत)।
छत्तीसगढ़ को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित नौगई तिहरा हत्याकांड की जांच अब अपने सबसे निर्णायक और अंतिम अंजाम की ओर बढ़ चली है। राज्य सरकार की तल्ख अनुशंसा के बाद मामले को पूरी तरह अपने हाथ में लेते ही देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की 5 सदस्यीय हाई-प्रोफाइल टीम आज सुबह तड़के कोरिया जिले पहुंच गई। सीबीआई की इस एंट्री से न सिर्फ पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है, बल्कि इस जघन्य कांड को अंजाम देने वाले और इसे दबाने की कोशिश करने वाले रसूखदारों की सांसें अटक गई हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई की टीम फिलहाल चरचा स्थित पंचवटी रेस्ट हाउस में डटी हुई है, जिसे अस्थायी तौर पर जांच का मुख्य कमांड सेंटर (वार-रूम) बनाया गया है। टीम के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस से अब तक की केस डायरी, गिरफ्तार आरोपियों के कबूलनामे और जब्त किए गए सभी अहम साक्ष्यों से जुड़े दस्तावेजों को अपने होल्ड में ले लिया है। दस्तावेजों की प्राथमिक स्क्रूटनी के बाद टीम आज ही सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई गांव के लिए रवाना होगी, जहां वारदात वाले घटनास्थल का चप्पा-चप्पा खंगाला जाएगा।
वैज्ञानिक कसौटी पर परखा जाएगा हर एक सबूत
सीबीआई की यह विशेष टीम स्थानीय पुलिस की थ्योरी से अलग, बिल्कुल नए सिरे से और वैज्ञानिक (Scientific) तरीके से घटनास्थल का बारीकी से परीक्षण करेगी। सूत्रों के मुताबिक, टीम आज नौगई गांव में ‘क्राइम सीन री-क्रिएशन’ कर सकती है ताकि घटना की रात की पूरी क्रोनोलॉजी और कड़ियों को समझा जा सके। साक्ष्यों के पुनर्मूल्यांकन के साथ-साथ फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से उन कड़ियों को जोड़ा जाएगा जो अब तक पुलिसिया जांच में धुंधली या गायब नजर आ रही थीं।
रडार पर कई सफेदपोश, नए सिरे से होगी पूछताछ
इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि सीबीआई केवल गिरफ्तार आरोपियों तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। टीम घटना के प्रत्यक्षदर्शियों, गांव के संबंधित लोगों और शक के दायरे में आए कुछ अन्य संदिग्धों को समन जारी कर आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जांच की आंच कई रसूखदार चेहरों तक भी पहुंच सकती है, जिन्होंने इस मामले को रफा-दफा करने या मोड़ने की कोशिश की थी।
नजरिया: अब इंसाफ की उम्मीद
नौगई का तिहरा हत्याकांड सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की हत्या थी। स्थानीय स्तर पर जांच को लेकर उठ रहे सवालों और जन-आक्रोश के बाद जब मामला सीबीआई के सुपुर्द हुआ है, तो यह तय है कि अब असली गुनाहगार ज्यादा दिन कानून की आंखों में धूल नहीं झोंक पाएंगे। फाइलें चाहे जितनी भी दबाई गई हों, सीबीआई की ‘तीसरी आंख’ से सच का बच निकलना नामुमकिन है। कड़ियां जुड़ रही हैं, और बहुत जल्द इस खूनी खेल का पूरा सच बेनकाब होकर जनता के सामने होगा।




