जामनिक पर FIR, सिद्दीकी पर खामोशी! सचिव टोप्पो पर विधानसभा के आश्वासन की अनदेखी, मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ छवि पर उठे सवाल।
रायपुर | विशेष संवाददाता।
छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में कथित भ्रष्टाचार के पुराने मामलों पर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा सदस्य विद्यावती सिदार द्वारा विधानसभा सचिव को सौंपे गए ध्यानाकर्षण सूचना पत्र में आरोप लगाया गया है कि सदन में दिए गए सरकारी आश्वासन के बावजूद गंभीर आरोपों से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस मामले में जामनिक के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है, उसी प्रकरण में कथित रूप से शामिल सिद्दीकी के खिलाफ अब तक विभागीय या कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही सवाल अब विपक्ष और जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।ध्यानाकर्षण सूचना के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा निधि (ए.पी.एस.) के कथित दुरुपयोग और अनियमित भुगतान के मामले में तत्कालीन मंत्री ने विधानसभा में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। विभाग द्वारा निलंबन प्रस्ताव शासन को भेजे जाने की भी जानकारी दी गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी कार्रवाई अधूरी बताई जा रही है।
*सचिव टोप्पो की भूमिका पर उठे सवाल*
आरोप है कि जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश कुमार टोप्पो ने कार्रवाई को आगे बढ़ाने के बजाय संबंधित अधिकारियों को संरक्षण दिया। इतना ही नहीं, कुछ अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इससे विधानसभा में दिए गए आश्वासन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर विपक्ष का हमला
विपक्ष का कहना है कि यदि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे अधिकारियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो इससे न केवल विभाग की साख प्रभावित होगी, बल्कि मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति भी सवालों के घेरे में आ जाएगी।
*ध्यानाकर्षण सूचना में प्रमुख मांगें।*
- पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच।
- दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई।
- विधानसभा में दिए गए आश्वासनों का तत्काल पालन।
- भ्रष्टाचार के मामलों में जिम्मेदारी तय कर जनता का विश्वास बहाल किया जाए।
*सबसे बड़ा सवाल…*
जब जामनिक पर FIR दर्ज हो सकती है, तो सिद्दीकी पर अब तक खामोशी क्यों?अब निगाहें राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग पर हैं कि विधानसभा के आश्वासन को अमल में लाया जाता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



