मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB): जिला प्रशासन का एक और ‘फ्लॉप शो’ सामने आया है। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित शिविर, जो आम जनता की उम्मीदों का केंद्र होने चाहिए थे, वे मात्र अधिकारियों की बैठक और ‘फोटो सेशन’ बनकर रह गए हैं। ग्राम पंचायत बरबसपुर में आयोजित शिविर में आम जनता का नदारद होना यह साबित करता है कि प्रशासन को जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।
बरबसपुर में पसरा सन्नाटा, शिविर सिर्फ कागजों में सीमित
15 जून 2026 को जिला कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के बाद बड़े तामझाम के साथ शिविरों की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद निराशाजनक है। बरबसपुर में आयोजित शिविर में कुर्सियां खाली रहीं और अधिकारी आपस में ही चर्चा करते नजर आए। जनता को सूचना देने का कोई भी प्रयास नहीं किया गया। क्या यह महज दिखावा है, या फिर शिविर के नाम पर आने वाले बजट की बंदरबांट करने की एक सोची-समझी साजिश?
प्रशासन का ‘वीआईपी’ रवैया: जनता जाए तो जाए कहाँ?
तहसीलदार साहेब का यह तर्क कि “शिविर अनुभाग स्तरीय है और 19 से 22 जून तक मनेंद्रगढ़ में चल रहा है,” प्रशासन की लचर व्यवस्था को उजागर करता है। सवाल यह है कि यदि शिविर अनुभाग स्तर पर था, तो बरबसपुर जैसी पंचायतों में इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई?
- जनता का पैसा, अफसरशाही की मौज: क्या इन शिविरों में होने वाला खर्च सिर्फ अधिकारियों के लिए है?
- प्रचार क्यों नहीं?: साप्ताहिक बाजारों में मुनादी या सूचना के अभाव में आम जनता को दूर-दराज के शिविरों तक आने की जानकारी क्यों नहीं दी गई?
- जिम्मेदारी से भागते अधिकारी: जब प्रशासन जनता के पास तक नहीं पहुँच सकता, तो उसे शिविर का नाम देकर सरकारी खजाने का दुरुपयोग करने का क्या अधिकार है?
MCB प्रशासन पर उठते गंभीर सवाल
MCB जिला प्रशासन अब सीधे तौर पर सवालों के घेरे में है।
“क्या बरबसपुर जैसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सिर्फ वोट बैंक हैं? जब योजनाओं का लाभ देने की बारी आती है, तो प्रशासन उन्हें जानकारी तक देना जरूरी क्यों नहीं समझता?”
यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता है। 19 से 22 जून तक मनेंद्रगढ़ में आयोजित होने वाले शिविरों का हश्र भी यही होगा, यदि प्रशासन ने अब भी अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया।
आम जनता अब पूछ रही है:
- क्या कलेक्टर महोदय इस प्रशासनिक लापरवाही पर संज्ञान लेंगे?
- क्या बरबसपुर जैसे पंचायतों में शिविर के नाम पर हुए खर्च की जांच होगी?
- क्या जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी?
प्रशासन की यह चुप्पी अब और अधिक संदेह पैदा कर रही है। क्या MCB का शासन-प्रशासन सिर्फ ‘खास लोगों’ के लिए है, या आम आदमी के लिए भी इसके दरवाजे खुलेंगे?




