कलेक्टर की 24 पन्नों की गोपनीय रिपोर्ट लीक, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी दोषी सिद्ध
जेम पोर्टल के नियमों की उड़ीं धज्जियां, न क्रय समिति के दस्तखत लिए और न ही सामान का भौतिक सत्यापन कराया; रायपुर की ‘झूठी क्लीन चिट’ बेनकाब।
विशेष संवाददाता, मनेंद्रगढ़।छत्तीसगढ़ शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ में गरीब बेटियों के स्वाभिमान और सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक बेहद सनसनीखेज और शर्मनाक मामला आधिकारिक रूप से प्रमाणित हो गया है। खड़गवां के चनवारीडांड स्थित महामाया मंदिर परिसर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में गरीब बेटियों को चांदी के नाम पर ‘गिल्ट’ (नकली धातु) के मंगलसूत्र बांट दिए गए।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सौरभ मिश्रा की शिकायत पर कलेक्टर संतन देवी जांगड़े द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति ने इस पूरे घोटाले की परतें उखाड़ दी हैं। जांच में शिकायत के एक-एक बिंदु हुबहू सच पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद कांग्रेस ने प्रेस वार्ता कर जांच रिपोर्ट के 24 पन्नों के गोपनीय दस्तावेज मीडिया के सामने रख दिए हैं, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
नियमों को जेब में रखकर अधिकारी ने खेला ‘करोड़ों का खेल’
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कार्यालय से जारी पत्र क्रमांक 2760/शिकायत/2026 के अनुसार, इस क्रय प्रक्रिया में जिला कार्यक्रम अधिकारी (WCD) आदित्य शर्मा द्वारा वित्तीय अधिकार पुस्तिका और जेम पोर्टल के नियमों की अंधाधुंध धज्जियां उड़ाई गईं:
बिना प्रशासनिक मंजूरी के खुलीं निविदाएं: जांच में पाया गया कि संबंधित फर्मों से कोटेशन तो प्राप्त किए गए, किंतु तुलनात्मक पत्रक और कोटेशन खोलने के लिए गठित ‘क्रय समिति’ का न तो कोई हस्ताक्षर लिया गया और न ही कोई प्रशासनिक अनुमोदन कराया गया।
फिजिकल वेरिफिकेशन तक नहीं: बेटियों को उपहार में दी जाने वाली सामग्रियों और मंगलसूत्रों की डिलीवरी के बाद विभाग ने उनका कोई भौतिक सत्यापन (Physical Verification) ही नहीं कराया, ताकि नकली और घटिया सामग्री को आसानी से खपाया जा सके।
कलेक्टर की अनुमति के बिना ही कर दिया भुगतान: वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर, क्रय सामग्री के भुगतान से पहले तत्कालीन कलेक्टर महोदय से किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक स्वीकृति नहीं ली गई, जो सीधे तौर पर शासकीय राशि के गबन का मामला है।
बड़ा सवाल: चांदी के बदले ‘लोहा’ बांटने का अधिकार किसने दिया?
- क्रय समिति ने नोटशीट में स्पष्ट रूप से ‘चांदी का मंगलसूत्र’ देने की
- अनुशंसा की थी। विभाग ने अपनी सफाई में दलील दी कि गुणवत्ता में कमी
- पाए जाने पर ₹1,000 प्रति मंगलसूत्र की कटौती कर वधू के खातों में
- ₹36,000 जमा किए गए।
परंतु सवाल यह उठता है कि जब टेंडर चांदी का था, तो अधिकारी को खुद से गुणवत्ता घटाकर नकली मंगलसूत्र बांटने का अधिकार किसने दिया?कांग्रेस ने वधुओं के खाते में ₹1,000 डालने के दावे को भी पूरी तरह संदेहास्पद और मनगढ़ंत बताया है।
रायपुर के ‘बड़े साहब’ की झूठी क्लीन चिट की खुली पोल
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और राजनैतिक पहलू यह है कि जब पीड़ित गरीब महिलाओं ने वीडियो जारी कर इस भ्रष्टाचार को उजागर किया था, तब संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग (नवा रायपुर) के संचालक ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले पर लीपापोती करते हुए योजना को पूरी तरह साफ-सुथरा बता दिया था और क्लीन चिट दे दी थी।
प्रेस वार्ता में पूर्व नपाध्यक्ष प्रभा पटेल और जिला कांग्रेस महामंत्री पूनम सिंह ने इसी विरोधाभास को रेखांकित करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, “एक तरफ रायपुर में बैठे संचालक महोदय भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए झूठी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत की जांच कर रही कलेक्टर एमसीबी की रिपोर्ट (दिनांक 19/06/2026) साफ कह रही है कि शिकायत सौ फीसदी सच है। यह साबित करता है कि भ्रष्टाचार के तार ऊपर तक जुड़े हुए हैं।”
दोषी अधिकारी पर गिरेगी गाज, कांग्रेस ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी


कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े ने इस जांच प्रतिवेदन को अग्रिम दंडात्मक व अनुशासनात्मक कार्रवाई हेतु सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय (महानदी भवन, नवा रायपुर) को सौंप दिया है। रिपोर्ट में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री आदित्य शर्मा को वित्तीय नियमों के उल्लंघन और घोर लापरवाही का मुख्य दोषी पाया गया है।
प्रेस वार्ता में मौजूद पार्षद किरण कुजूर, हामिदा खातून, रुमा चटर्जी और शोभना वर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि बेटियों के हक पर डाका डालने वाले इस दोषी अधिकारी को तत्काल सस्पेंड कर जेल नहीं भेजा गया, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र जन-आंदोलन करेगी।




