दावों की खुली पोल: बिना आंधी-तूफान के भी घंटों गुल हो रही बिजली; विभाग की लापरवाही आई सामने
मनेंद्रगढ़।मानसून की दस्तक से पहले जहां हर साल विद्युत विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर ‘प्री-मानसून मेंटिनेंस’ (मानसून पूर्व रखरखाव) का दावा किया जाता है, वहीं इस बार मनेंद्रगढ़ शहर में इन दावों की पूरी तरह हवा निकल चुकी है। अमूमन हर साल बरसात शुरू होने से पहले पेड़ों की छंटाई, जर्जर तारों को बदलना और ट्रांसफार्मर की चेकिंग का काम पूरा कर लिया जाता है, लेकिन इस वर्ष मनेंद्रगढ़ में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही सामने आ रही है।
आए दिन अघोषित कटौती से जनता परेशान
शहरवासियों का कहना है कि अभी भारी बरसात शुरू भी नहीं हुई है, लेकिन बिजली गुल होने का सिलसिला लगातार जारी है। दिन हो या रात, बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों बिजली बंद रहना अब आम बात हो चुकी है। हल्की सी हवा चलने या बूंदाबांदी होने पर भी पूरा शहर अंधेरे में डूब जाता है। इससे न केवल आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है, बल्कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई और व्यापारियों का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
बिजली उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा:
“हर साल विभाग कहता है कि मेंटिनेंस कर लिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अगर बारिश से पहले तैयारी की गई होती, तो रोज़-रोज़ बिजली क्यों भागती? अभी तो पूरी बरसात बाकी है, आगे क्या होगा सोचकर ही डर लगता है।”
— स्थानीय निवासी, मनेंद्रगढ़
आखिर क्यों नहीं हुआ समय पर मेंटिनेंस?
अकसर देखा गया है कि बिजली विभाग अप्रैल और मई के महीनों में ही अपना पूरा मेंटिनेंस कार्य कंप्लीट कर लेता है ताकि बारिश के दौरान फॉल्ट कम से कम हों। किंतु मनेंद्रगढ़ में इस बार विभाग ने समय रहते सुध नहीं ली।
लापरवाही के मुख्य कारण और असर:
- पेड़ों की छंटाई न होना: तारों के पास लटक रही पेड़ों की टहनियों को समय पर नहीं काटा गया, जो हवा चलते ही तारों से टकराकर शॉर्ट-सर्किट का कारण बन रही हैं।
- जर्जर तार और ढीले कनेक्शन: कई इलाकों में आज भी पुराने और जर्जर तार झूल रहे हैं, जिन्हें बदलने की जहमत विभाग ने नहीं उठाई।
- सुस्त अमला: बिजली गुल होने पर जब उपभोक्ता शिकायत केंद्र (कंट्रोल रूम) में फोन करते हैं, तो या तो फोन उठता नहीं या फिर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
व्यापारियों और छात्रों में भारी आक्रोश
लगातार हो रही इस आंख-मिचौली से स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश है। इलेक्ट्रॉनिक, जेरॉक्स, और ठंडे पेय पदार्थों का व्यवसाय करने वाले दुकानदारों का कहना है कि बिजली न रहने से उनका भारी नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, उमस और गर्मी के बीच बार-बार बिजली कटने से लोग रात भर सो नहीं पा रहे हैं।
विद्युत विभाग की इस सुस्त कार्यप्रणाली और लापरवाही को लेकर अब क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी आवाज उठाना शुरू कर दिया है। यदि विभाग ने तुरंत अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया और मेंटिनेंस के अधूरे कामों को युद्ध स्तर पर पूरा नहीं किया, तो आने वाले दिनों में नागरिकों को और भी गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।




