एमसीबी/भरतपुर: विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत धोवताल (आश्रित ग्राम मंटोलिया) से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देने वाली है। 95 वर्षीय समयलाल पण्डो और उनकी पत्नी रुकमन पण्डो, जो अब चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं, अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर बुनियादी सुविधाओं के लिए शासन-प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
“हमें बस रहने को छत और इलाज मिल जाए”
बढ़ती उम्र ने शरीर को कमजोर कर दिया है, तो अभावों ने हौसले तोड़ दिए हैं। समयलाल पण्डो ने कांपती आवाज़ में शासन से गुहार लगाई है कि उनकी अंतिम इच्छा बस इतनी है कि उन्हें एक सुरक्षित पक्का आवास मिल जाए और समय पर इलाज की सुविधा मुहैया हो सके। बीमारी और आर्थिक तंगी के कारण यह दंपत्ति अपने दैनिक कार्यों को करने में भी अक्षम है।
अभावों में बीत रही जिंदगी
- ग्रामीणों का कहना है कि यह दंपत्ति लंबे समय से नारकीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर है। स्थिति इतनी गंभीर है कि इन्हें इलाज करवाने के लिए खुद चलकर अस्पताल तक जाने में भी संघर्ष करना पड़ता है।
- आवास का संकट: जर्जर हालत में रहने के कारण बरसात और भीषण गर्मी में इनका जीवन और भी कठिन हो जाता है।
- स्वास्थ्य सेवा का अभाव: नियमित स्वास्थ्य परीक्षण न होने से उनकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।
प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल
यह मामला सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या 95 वर्ष की आयु में भी इन बुजुर्गों को अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा? स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से सर्वे करे और उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य स्वास्थ्य लाभ प्रदान करे।
क्या प्रशासन जागेगा?
धोवताल के इस वृद्ध दंपत्ति की मार्मिक पुकार अब प्रशासन की संवेदनशीलता की परीक्षा ले रही है। क्या शासन-प्रशासन के अधिकारी इन बेबस बुजुर्गों तक समय रहते पहुंचेंगे, या फिर उनकी यह गुहार सरकारी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगी?




