मनेन्द्रगढ़। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ अब सवालों के घेरे में है। मनेन्द्रगढ़ बस स्टैंड के समीप हुई एक बस दुर्घटना ने इस योजना के क्रियान्वयन में बरती जा रही गंभीर लापरवाही की पोल खोल दी है। जनकपुर-मलकडोल रूट के लिए आवंटित बस का मनेन्द्रगढ़ में अनियंत्रित होकर दीवार से टकराना, सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मंगलवार दोपहर ‘दुर्गा ट्रेवल्स’ की एक बस, जो कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत संचालित है, अचानक मनेन्द्रगढ़ बस स्टैंड के पास अनियंत्रित होकर एक दीवार से जा टकराई। गनीमत रही कि बस खाली थी, वरना एक बड़ी जनहानि हो सकती थी। इस घटना ने साबित कर दिया है कि ग्रामीण अंचलों में सुगम परिवहन के नाम पर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है।
सब्सिडी का लाभ, नियमों का अपमान
बस संचालकों और स्थानीय जानकारों का आरोप है कि ग्रामीण सेवा की आड़ में नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं:
रूट का उल्लंघन: जनकपुर-मलकडोल मार्ग के लिए स्वीकृत बस को मनमाने तरीके से मनेन्द्रगढ़-जनकपुर के बीच ‘लाइन गाड़ी’ (व्यावसायिक रूट) के रूप में चलाया जा रहा है।
योजना का दुरुपयोग: सरकार प्रति किलोमीटर 26 रुपये की मोटी सब्सिडी और टैक्स में भारी छूट दे रही है, ताकि ग्रामीण जनता को सुविधा मिले। लेकिन ऑपरेटर इसका फायदा उठाकर मुख्य मार्गों पर व्यावसायिक लाभ कमाने में लगे हैं।
सुरक्षा से समझौता: नियमों की अनदेखी और निर्धारित रूट से हटकर बसें चलाने के कारण ही आज यह हादसा हुआ है, जो भविष्य के किसी बड़े खतरे का संकेत है।
“कार्रवाई नहीं, तो बढ़ेगा खतरा”
स्थानीय बस संचालकों ने इस घटना को व्यवस्था की विफलता करार दिया है। उन्होंने जिला परिवहन अधिकारी (DTO) से मांग की है कि:
तत्काल जांच: परमिट शर्तों का उल्लंघन करने वाले ऑपरेटरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
रूट का सत्यापन: ग्रामीण बस सेवा का संचालन केवल उन रूटों पर ही सुनिश्चित हो, जिसके लिए उन्हें परमिट मिला है।
जवाबदेही: सब्सिडी लेने वाले ऑपरेटरों की जवाबदेही तय हो ताकि आम आदमी की जान के साथ खिलवाड़ न हो।
सवाल अब यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? या फिर ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ में व्याप्त इस भ्रष्टाचार और लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?




