एमसीबी (कोरिया): छत्तीसगढ़ के एमसीबी (MCB) जिले के भरतपुर विकासखंड से एक चौंकाने वाली और शर्मनाक खबर सामने आई है। यहाँ सरकारी योजनाओं की पोल खोलते हुए पंचायत कार्यों में लगे करीब 100 मजदूरों को मजदूरी के नाम पर महज 7 रुपये प्रति दिन का भुगतान किया गया है। यह खुलासा होने के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।
क्या है पूरा मामला?
भरतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत नौडिया में मनरेगा और अन्य पंचायत कार्यों में लगे गरीब मजदूरों ने जब अपने खाते चेक किए, तो उनके होश उड़ गए। मस्टर रोल के अनुसार मिलने वाली तयशुदा मजदूरी के बजाय, मजदूरों के खाते में नाममात्र की राशि (मात्र 7 रुपये प्रतिदिन) डाली गई है। भीषण गर्मी और कड़कती धूप में पसीना बहाने वाले इन 100 से अधिक श्रमिकों के साथ हुआ यह व्यवहार न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि गरीबों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सरकार को घेरा
पीड़ित मजदूरों ने मामले की जानकारी पूर्व विधायक गुलाब कमरो को दी। सूचना मिलते ही पूर्व विधायक ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे ‘गरीबों के हक पर डाका’ करार देते हुए कहा:”मजदूरों के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाने का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा सरकार आज उन्हीं गरीब श्रमिकों के पसीने की कमाई को लूट रही है। यह प्रदेश की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता और अमानवीय कृत्य है।”गंभीर सवाल: आखिर किसकी जेब में जा रहा मजदूरों का हक?
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
अगर मस्टर रोल में पूरी मजदूरी दर्ज है, तो भुगतान 7 रुपये कैसे हुआ?मजदूरों की मेहनत की कमाई के बीच में ‘दलाल’ कौन बैठा है?क्या प्रशासन की नाक के नीचे गरीब मजदूरों का खुलेआम शोषण हो रहा है?
उच्चस्तरीय जांच की मांग
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी या ठेकेदार इस घोटाले के पीछे हैं, उनके खिलाफ तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। अन्यथा, मजदूरों के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन किया जाएगा।




