धरातल पर शून्य, सुर्खियां बटोरने में अव्वल: देवगढ़ परिक्षेत्र में डीएफओ के ‘दिखावे’ से मचा हड़कंप।
कोरिया: बैकुंठपुर वन मंडल इन दिनों वनों की अंधाधुंध कटाई और लकड़ी तस्करी के कारण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। जंगल कट रहे हैं, माफिया मालामाल हो रहे हैं और वन विभाग सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने में लगा है। हाल ही में वनमंडल अधिकारी प्रभाकर खलको के नेतृत्व में एक ट्रक पकड़ा गया, जिसे विभाग अपनी बड़ी उपलब्धि बताकर वाहवाही लूटने की फिराक में है, लेकिन यह कार्रवाई महज एक ‘दिखावा’ और ‘आई वॉश’ साबित हो रही है।
क्या यह केवल खानापूर्ति है?
दस्तावेजों और फाइल ‘1001266742.jpg’ में कैद तस्वीर इस तथाकथित बड़ी कार्रवाई की पोल खोलती है। धरातल पर स्थिति यह है कि विभाग को तस्करों के मुख्य सिंडिकेट की कोई जानकारी नहीं है, या शायद जानबूझकर अनजान बना हुआ है। सवाल यह है कि यदि विभाग वास्तव में गंभीर है, तो जंगल से लकड़ी कटने और ट्रक में लोड होने तक की पूरी प्रक्रिया में वन अमला कहाँ सो रहा था?
मिली-जुली मिलीभगत, बढ़ता तस्करों का हौसला
वन मंडल बैकुंठपुर में जो कुछ भी हो रहा है, उसे ‘मिली-जुली सरकार’ वाले प्रशासनिक ढर्रे के रूप में देखा जा रहा है।
- मार्किंग वाली लकड़ियों की तस्करी: सबसे गंभीर बात यह है कि मार्किंग की गई लकड़ियों को खुलेआम तस्करी की जा रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव नहीं है।
- प्रशासनिक संरक्षण का संदेह: विभाग की यह कार्यशैली तस्करों के मनोबल को लगातार बढ़ा रही है। क्या यह मात्र एक इत्तेफाक है या किसी बड़े सिंडिकेट को बचाने का प्रयास?
अब आगे क्या?
वन विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली ने बैकुंठपुर के जंगलों को असुरक्षित कर दिया है। सवाल यह है कि क्या वन विभाग वाकई इस नेटवर्क को तोड़ने में सक्षम है, या यह दिखावे की कार्रवाई महज माफियाओं को संरक्षण देने का एक तरीका है?




