मनेंद्रगढ़/केल्हारी: ग्राम पंचायत केल्हारी में चल रहे ‘स्वच्छता और श्रमदान’ अभियान की पोल खुल गई है। अभियान के तहत श्रमदान की तस्वीरें तो सोशल मीडिया और प्रचार माध्यमों में खूब चमकाई गईं, लेकिन जमीन पर हकीकत बिल्कुल उलट है। सफाई के बड़े-बड़े दावों के बाद भी गांव के कई सार्वजनिक स्थल और रास्ते आज भी कचरे के ढेर में तब्दील हैं।
केवल खानापूर्ति, सफाई नदारद।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि श्रमदान का आयोजन केवल फोटो खिंचवाने और प्रशासनिक औपचारिकता पूरी करने तक सीमित रहा। अभियान के बाद कचरा हटाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई, जिससे गांव की बदहाली जस की तस बनी हुई है। गंदगी के कारण आम नागरिकों का जीना दूभर हो गया है।
गंदगी से जूझते ग्रामीण।
मुख्य रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर पसरी गंदगी के चलते बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिखावे की राजनीति श्रमदान केवल दिखावे का जरिया बन गया है।अधूरी व्यवस्था कागजों में गांव स्वच्छ है, लेकिन असलियत में कचरे का ढेर है।प्रशासनिक उदासीनता बार-बार शिकायत के बावजूद पंचायत प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
’फोटो नहीं, काम चाहिए’।
नाराज ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है कि उन्हें दिखावे के श्रमदान नहीं, बल्कि नियमित सफाई व्यवस्था चाहिए। उन्होंने पंचायत प्रशासन को दो टूक जवाब देते हुए मांग की है कि श्रमदान की औपचारिकता बंद हो और कचरा निस्तारण का ठोस प्रबंधन किया जाए।जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर सच्चाई देखें और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करें।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गांव को कचरा मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे उच्च अधिकारियों से इसकी कड़ी शिकायत करेंगे।
क्या स्वच्छता के नाम पर हो रही इस खानापूर्ति पर अब कोई कार्रवाई होगी, या केल्हारी का यह हाल इसी तरह बना रहेगा?




