बैकुंठपुर: कोरिया वन मंडल में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर मची खलबली का असर आखिरकार दिखने लगा है। नव-निर्माणाधीन कार्यालय भवन के निर्माण में मानकों की अनदेखी और ‘निजी इंजीनियरों’ की मनमानी के आरोपों के बीच, विभाग ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए प्रभारी रेंजर शैलेश कुमार गुप्ता को कार्यालय अटैच कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
कोरिया वन मंडल में बन रहे नए कार्यालय भवन को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि विभाग के पास योग्य इंजीनियरों के होने के बावजूद, निर्माण कार्य पूरी तरह से ‘निजी इंजीनियरों’ और चहेते ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया गया था। नतीजतन, इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे थे। स्थानीय लोगों का कहना था कि भवन का ढांचा अभी से ही जर्जर दिखने लगा है, जो विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
डीएफओ की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण में वन मंडलाधिकारी (DFO) प्रभाकर खलखो की कार्यप्रणाली भी निशाने पर रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या आला अधिकारियों की मौन सहमति के बिना सरकारी धन का इतना बड़ा बंदरबांट संभव था? विभाग के भीतर और बाहर उठ रहे इन सवालों ने पूरे प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
रेंजर को अटैच करना केवल शुरुआत?
प्रभारी रेंजर शैलेश कुमार गुप्ता को कार्यालय अटैच किए जाने को भले ही विभाग की त्वरित कार्रवाई माना जा रहा हो, लेकिन स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि यह केवल एक दिखावा हो सकता है। लोगों का कहना है कि यदि मामले की जड़ तक जाना है, तो केवल एक कर्मचारी को हटाना काफी नहीं होता।




