मानसून से पहले ‘मिशन जल’: मनेंद्रगढ़ में कलेक्टर की सख्ती, 15 जून तक जल संचयन का लक्ष्य।

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इन साइड स्टोरी। MCB। प्रदीप पाटकर।
​मनेंद्रगढ़। मरुस्थल की ओर बढ़ती वैश्विक चुनौतियों और भविष्य के जल संकट को देखते हुए, मनेंद्रगढ़ प्रशासन अब पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में आ गया है। 28 मई 2026 को कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े और जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंकिता सोम द्वारा किया गया औचक निरीक्षण महज एक प्रशासनिक दौरा नहीं, बल्कि मानसून से पहले जल सुरक्षा की एक बड़ी तैयारी है।

​जमीनी हकीकत: कागजों से बाहर आई योजनाएं।

​प्रशासनिक दल ने सिरौली, सीरिया खोह, चिराईपानी, लोहारी और लाई जैसी ग्राम पंचायतों का दौरा कर यह सुनिश्चित किया कि मनरेगा की राशि केवल फाइलों में खर्च न हो, बल्कि धरातल पर पानी की एक-एक बूंद सहेजने में काम आए। निरीक्षण के दौरान फोकस केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि ‘गुणवत्ता’ पर रहा।

​इनसाइड स्टोरी: अधिकारियों पर दबाव, समय की चुनौती।

​सूत्रों के अनुसार, यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसून के आगमन में अब बहुत कम समय शेष है। कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि 15 जून की समय-सीमा किसी भी हाल में बढ़ाई नहीं जाएगी। यह डेडलाइन इसलिए तय की गई है ताकि:​मानसून का लाभ: अगर स्टॉप डैम और रिचार्ज पिट समय पर तैयार हो जाते हैं, तो पहली बारिश के साथ ही भू-जल स्तर (Groundwater level) में सुधार की उम्मीद बढ़ जाएगी।​आजीविका पर फोकस: डबरी निर्माण से ग्रामीणों को न केवल सिंचाई के लिए पानी मिलेगा, बल्कि वे दूसरी फसल लेने में भी सक्षम होंगे, जिससे पलायन रुकेगा।

​तकनीकी बारीकियां और चुनौतियां।

​निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक टीम ने कन्टूर ट्रेंच और रिचार्ज पिट के तकनीकी पहलुओं को परखा। जानकारों का मानना है कि यदि ये निर्माण वैज्ञानिक तरीके से नहीं किए गए, तो इनका लाभ नहीं मिल पाएगा। यही कारण है कि कलेक्टर ने तकनीकी अमले को मौके पर ही कड़े निर्देश दिए हैं।

​’महतारी सदन’ से बदल रही तस्वीर।

​केवल जल संरक्षण ही नहीं, बल्कि महतारी सदन और सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण कार्य के निरीक्षण से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रशासन ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और स्वच्छता के प्रति भी गंभीर है। महतारी सदन के निर्माण से ग्रामीण महिलाओं को संगठित होने और अपने अधिकारों पर चर्चा करने के लिए एक सुरक्षित मंच मिलेगा।

​क्या कहता है प्रशासन?

​प्रशासनिक अमला इस बात को लेकर आश्वस्त है कि यदि निर्धारित समय सीमा में काम पूरा होता है, तो मनेंद्रगढ़ के ग्रामीण इलाकों में जल संकट की समस्या में काफी हद तक कमी आएगी। कलेक्टर की सख्ती ने स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और ठेकेदारों में एक हड़कंप की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे काम की गति में तेजी आना तय माना जा रहा है।
​निष्कर्ष: 15 जून तक का समय मनेंद्रगढ़ के विकास और पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक ‘परीक्षा’ की तरह है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासनिक अमला मानसून की पहली बौछार से पहले अपनी तैयारी को मुकम्मल कर पाता है या नहीं।

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