*झिझक से जागरूकता तक: अब खुलकर बात कर रही हैं बेटियां*

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*मासिक धर्म स्वच्छता अभियान से एमसीबी जिले में बदल रही सोच, बढ़ रहा आत्मविश्वास*

*स्वस्थ बेटी-सशक्त नारी का संदेश लेकर गांव-गांव पहुंच रही स्वास्थ्य टीम*

*एमसीबी/27 मई 2026/* कभी जिस विषय पर गांवों में धीमी आवाज़ में बात होती थी…आज उसी मुद्दे पर बेटियां खुलकर सवाल पूछ रही हैं। जो किशोरियां पहले मासिक धर्म के दौरान झिझक, डर और असहजता महसूस करती थीं, अब वे जागरूकता और आत्मविश्वास के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना सीख रही हैं। मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में चल रहा व्यापक जागरूकता अभियान अब सामाजिक बदलाव की कहानी बनता जा रहा है।

*गांव-गांव पहुंच रही जागरूकता की रोशनी*

भरतपुर, जनकपुर, खड़गवां, मनेंद्रगढ़ और चिरमिरी विकासखंड के दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की टीम लगातार पहुंच रही है। बहेराटोला, मेंड्रा, कुंवारपुर, जनकपुर, केल्हारी, नागपुर, चनवारीडांड, बंजी, हरचौका, देवगढ़, पिपरिया, बहरासी, घुटरा, बरबसपुर और कोटाडोल जैसे गांवों में आयोजित शिविरों में किशोरियों और महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण, संक्रमण से बचाव और एनीमिया जैसी समस्याओं के बारे में जानकारी दी जा रही है। कई स्थानों पर निशुल्क सेनेटरी पैड वितरण, हीमोग्लोबिन जांच और स्वास्थ्य परीक्षण भी किए जा रहे हैं।

*“पीरियड्स शर्म नहीं, स्वास्थ्य का हिस्सा है”*

स्वास्थ्य शिविरों में किशोरियों को बताया जा रहा है कि मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि महिलाओं के शरीर की सामान्य जैविक प्रक्रिया है। पहले जहां कई लड़कियां इस दौरान स्कूल जाना छोड़ देती थीं, वहीं अब उन्हें समझाया जा रहा है कि इस समय भी पढ़ाई और सामान्य दिनचर्या जारी रखना जरूरी है।

*अस्वच्छता से बढ़ सकता है गंभीर बीमारी का खतरा*

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक एक ही पैड का उपयोग करना या अस्वच्छ कपड़े इस्तेमाल करना संक्रमण और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसीलिए स्वास्थ्य टीम गांवों में महिलाओं को हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलने, साफ-सफाई रखने और संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दे रही है।

*2014 में शुरू हुआ था वैश्विक अभियान*

मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की शुरुआत वर्ष 2014 में जर्मनी की संस्था ASH United द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को सुरक्षित माहवारी प्रबंधन के प्रति जागरूक करना और मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को खत्म करना था। 28 मई की तिथि प्रतीकात्मक रूप से चुनी गई, क्योंकि महिलाओं का मासिक चक्र सामान्यतः 28 दिनों का होता है और मासिक धर्म लगभग 5 दिनों तक चलता है।

*मुख्यमंत्री की प्राथमिकता- हर बेटी स्वस्थ और आत्मनिर्भर बने*

मा. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर लगातार विशेष अभियान चला रही है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि हर बेटी तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकें।

*स्वास्थ्य मंत्री की पहल से बढ़ी जागरूकता*

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में स्कूलों, पंचायत भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। किशोरियों को पोषण, स्वच्छता और संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

*अब सोच बदलने की जरूरत*

आज भी समाज के कई हिस्सों में मासिक धर्म को लेकर अंधविश्वास और सामाजिक झिझक मौजूद है। कई महिलाओं को इस दौरान सामान्य गतिविधियों से रोका जाता है, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार, शिक्षक और समाज को इस विषय पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए ताकि बेटियां बिना डर और संकोच के स्वस्थ जीवन जी सकें।

*स्वस्थ नारी से ही बनेगा सशक्त समाज*

मासिक धर्म स्वच्छता दिवस केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और अधिकारों से जुड़ा एक सामाजिक आंदोलन बन चुका है।एमसीबी जिले के गांवों में चल रहे जागरूकता कार्यक्रम यह संदेश दे रहे हैं कि जब बेटियां स्वस्थ, जागरूक और आत्मविश्वासी होंगी, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त बनेगा।

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