स्वच्छता के नाम पर ‘सफेद हाथी’ और भ्रष्टाचार का खेल।

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प्रदीप पाटकर।स्वच्छ भारत मिशन (SBM) केंद्र सरकार की उन महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देना है, बल्कि ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलना भी है। लेकिन, जब नेक इरादों वाली योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएं, तो वे समाज के लिए अभिशाप बन जाती हैं। छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले से सामने आया मामला न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को भी उजागर करता है।

क्या है ‘डेटिंग-पेंटिंग’ का यह खेल?

प्राप्त सूत्र और जानकारी के अनुसार, MCB जिले में शौचालयों के निर्माण में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। नया शौचालय बनाने के बजाय, पहले से बने हुए शौचालयों पर केवल ‘डेटिंग-पेंटिंग’ (पुताई और मरम्मत) की जा रही है और उसे ‘नया’ बताकर नए हितग्राहियों के नाम पर सरकारी फंड निकाला जा रहा है। यह सीधे तौर पर 15वें वित्त आयोग की राशि का दुरूपयोग और धोखाधड़ी का मामला है।

क्यों गंभीर है यह मुद्दा?

यह घोटाला मात्र धन की हेराफेरी नहीं है, बल्कि इसके कई गंभीर निहितार्थ हैं योजना के उद्देश्यों की विफलता: जो पैसा नए शौचालय बनाने के लिए था, ताकि हर घर में स्वच्छता सुनिश्चित हो सके, वह केवल कागजों पर ही खर्च हो रहा है।वास्तविक धरातल पर स्वच्छता का लक्ष्य कोसों दूर है।सरकारी खजाने का दुरुपयोग 15वें वित्त आयोग का पैसा ग्रामीण विकास के लिए होता है। इसे इस तरह लूटना सीधे तौर पर जनता के कर (Tax) के पैसे का अपमान है।प्रशासनिक मिलीभगत सवाल यह उठता है कि क्या बिना स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव है? यह प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

जांच और कड़ी कार्रवाई की दरकार।

विकास कार्यों में इस तरह की ‘लीपापोती’ बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। यह आवश्यक है कि शासन-प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेस्वतंत्र जांच जिला स्तर के अधिकारियों के बजाय किसी निष्पक्ष टीम या राज्य स्तरीय जांच एजेंसी से इसकी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराई जानी चाहिए।जवाबदेही तय हो उन सभी सरपंचों, सचिवों और इंजीनियरों की भूमिका की जांच होनी चाहिए, जिनके कार्यकाल में ये ‘पुराने शौचालय नए बनकर’ पास हुए हैं।वसूली और दंड दोषियों से न केवल गबन की राशि की वसूली हो, बल्कि उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी को ऐसी धांधली करने की हिम्मत न हो।

निष्कर्ष:

स्वच्छ भारत मिशन जैसे कार्यक्रमों की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत में छिपी होती है। अगर MCB जिले की यह घटना सच है, तो यह विकास के दावों की धज्जियां उड़ाने के लिए पर्याप्त है। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए दोषियों को बेनकाब करे, ताकि सरकारी योजनाओं पर जनता का भरोसा बना रहे। स्वच्छता का संकल्प तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक भ्रष्टाचार की गंदगी को जड़ से नहीं मिटाया जाएगा।

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