मनेन्द्रगढ़: सरस्वती विकास विद्यालय में समय का पहिया एक बार फिर पीछे मुड़ने वाला है। 14 जून 2026 का दिन इस विद्यालय के इतिहास में ‘पुरानी यादों’ के नाम दर्ज होने जा रहा है, जब 1988–89 बैच के पूर्व छात्र-छात्राएं अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे। यह केवल एक रियूनियन नहीं, बल्कि भावनाओं का एक ऐसा मिलन होगा जहाँ बचपन फिर से जीवंत हो उठेगा।
भावुक कर देने वाला ‘होमकमिंग’ प्रोग्राम
विद्यालय के प्राचार्य वेद प्रकाश पांडे के अनुसार, इस भव्य समागम में मनेन्द्रगढ़ के साथ-साथ देश के कोने-कोने से लगभग 50 से अधिक पूर्व विद्यार्थी अपने पुराने गुरुओं का आशीर्वाद लेने और अपने स्कूल के दिनों को फिर से जीने के लिए आ रहे हैं।
दिन भर का कार्यक्रम कुछ इस तरह रहेगा:
सुबह 8:00 बजे: भव्य स्वागत और नाश्ते के साथ आत्मीय मिलन।
सुबह 10:00 बजे: प्रार्थना सभा में सहभागिता, जो पुरानी यादों को ताजा कर देगी।
क्लासरूम विजिट: अपने पुराने डेस्क-बेंच को निहारना और स्कूल की दीवारों से जुड़ी यादों को साझा करना।
गुरु वंदन: सभागार में शिक्षकों का सम्मान और स्वागत समारोह, जहाँ साझा किए जाएंगे संघर्ष और सफलता के अनुभव।
सांस्कृतिक संध्या: पुरानी यादों को जीवंत करने वाली प्रस्तुतियाँ।
भोजन: अंत में सामूहिक स्वरूचि भोज का आनंद।
क्यों खास है यह आयोजन?
यह आयोजन सिर्फ मिलना-जुलना नहीं है, बल्कि गुरु-शिष्य की उस अटूट परंपरा को और अधिक सुदृढ़ करने का एक माध्यम है जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का कार्य करेगी। विद्यालय परिवार ने इस ‘महामिलन’ की पूरी तैयारी कर ली है।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि यह अवसर पूर्व विद्यार्थियों के अनुभवों को वर्तमान छात्रों के साथ जोड़कर एक नई पीढ़ी को संवारने में मददगार साबित होगा। 14 जून की सुबह, जब ये पूर्व छात्र अपनी पुरानी कक्षाओं में कदम रखेंगे, तो निश्चित रूप से वहां का माहौल पुरानी स्मृतियों की गूंज से भर जाएगा।




