मनेन्द्रगढ़ (छत्तीसगढ़): जनपद पंचायत मनेन्द्रगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत बरबसपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएम आवास 2.0) के सर्वे में भारी लापरवाही और अनियमितता का मामला सामने आया है। सर्वे टीम द्वारा जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर बड़ी संख्या में पात्र परिवारों को योजना से बाहर कर देने के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
जनपद सदस्य रीना अग्रवाल ने कलेक्टर से की शिकायत, सौंपी रिपोर्ट
इस गंभीर मामले को लेकर क्षेत्र क्रमांक 10 की जनपद सदस्य श्रीमती रीना अग्रवाल ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने 30 जून 2026 को मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एम.सी.बी.) जिले के कलेक्टर को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और आदिवासियों को न्याय दिलाने की मांग की है।
189 परिवारों का हुआ सर्वे, केवल 21 को मिला ‘पात्र’ का तमगा
कलेक्टर को सौंपे गए पत्र के अनुसार, ग्राम पंचायत बरबसपुर में वर्ष 2025-26 के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना का सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में कुल 189 परिवारों को शामिल किया गया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि सर्वे टीम ने केवल 21 परिवारों को ही योजना के पात्र माना, जबकि शेष 168 परिवारों (88 प्रतिशत) को अपात्र सूची में डाल दिया।
जमीनी हकीकत: आज भी 75% आबादी कच्चे और खपरैल मकानों में रहने को मजबूर
जनपद सदस्य ने सर्वे की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा है कि वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है। ग्राम पंचायत बरबसपुर में आज भी 75 प्रतिशत परिवार कच्चे और खपरैल के मकानों में निवास कर रहे हैं। ये सभी पीड़ित परिवार एस.ई.सी.सी. 2011 (SECC-2011) के स्वतः माप दण्डों (criteria) को पूरी तरह से पूरा करते हैं, फिर भी इन्हें अपात्र कर दिया गया।
आक्रोशित ग्रामीणों की विशेष ग्राम सभा ने सरकारी सर्वे को किया खारिज
सर्वे में हुई इस बड़ी धांधली के विरोध में बीते 24 जून 2026 को बरबसपुर में एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में उपस्थित ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से इस सरकारी सर्वे को ‘त्रुटिपूर्ण’ मानते हुए पूरी तरह से खारिज (निरस्त) कर दिया। इसके साथ ही, आवास से वंचित रह गए 168 वास्तविक परिवारों की एक नई सूची तैयार कर दोबारा भौतिक सत्यापन कराने का प्रस्ताव पारित किया गया।
31 जुलाई को बंद हो जाएगा आवास प्लस पोर्टल, 7 दिनों में जांच की मांग
शिकायत पत्र में इस बात की चिंता जताई गई है कि ‘आवास प्लस पोर्टल’ आगामी 31 जुलाई 2026 को बंद होने जा रहा है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो ये 168 परिवार स्थायी रूप से इस सरकारी योजना के लाभ से वंचित हो जाएंगे। इसलिए, प्रशासन से मांग की गई है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल एक विशेष जांच दल का गठन किया जाए और 7 दिनों के भीतर सभी वंचित परिवारों का पुनः भौतिक सत्यापन कराया जाए।
दोषी सर्वे टीम पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और अनुपूरक सूची में नाम जोड़ने की मांग
जनपद सदस्य और ग्रामीणों ने कलेक्टर से मुख्य रूप से तीन मांगें की हैं:
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- गलत और त्रुटिपूर्ण सर्वे करने वाली टीम के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
- 31 जुलाई 2026 से पहले सभी पात्र हितग्राहियों के नाम अनुपूरक सूची (Supplementary List) में अनिवार्य रूप से जोड़े जाएं।
- इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के गरीब लोगों को उनके आवास का कानूनी अधिकार और न्याय दिलाया जाए।
संलग्न दस्तावेज: शिकायत पत्र के साथ प्रमाण के तौर पर ‘ग्राम सभा के प्रस्ताव की छायाप्रति’ और ‘168 वंचित परिवारों की सूची’ भी कलेक्टर कार्यालय को सौंपी गई है, जिस पर ३० जून २०२६ की पावती (रिसीविंग सील) दर्ज है।




