मनेन्द्रगढ़ (MCB): जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका पदों के लिए हुई हालिया भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। चयन में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आवेदकों में भारी आक्रोश है।
मेरिट सूची में हेरफेर के गंभीर आरोप।
भर्ती प्रक्रिया में शामिल आवेदकों का आरोप है कि चयन सूची में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, अंतिम दावा-आपत्ति सूची जारी होने के बाद भी अधिक अंक प्राप्त करने वाले योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर दिया गया, जबकि उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया गया।
दस्तावेजों के अंकों में ‘खेला’।
आवेदकों का दावा है कि चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए सुनियोजित तरीके से गड़बड़ी की गई है। मुख्य रूप सेआरक्षण एवं गरीबी रेखा (BPL) कई मामलों में जाति प्रमाण पत्र और गरीबी रेखा सूची के आधार पर मिलने वाले निर्धारित अंक नहीं दिए गए।चहेतों को लाभ आरोप है कि नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अपने चहेते लोगों को लाभ पहुँचाने की कोशिश की गई है।
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग।
आरती (चैनपुर), कुसुम कली (सिरौली), मीना सिंह (बुंदेली), सुमित्रा (सिरौली), रामवती (परसगढ़ी) एवं संजुबाई (शंकरगढ़) सहित दर्जनों आवेदकों ने संयुक्त रूप से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने विभाग को बताया ‘भ्रष्टाचार का अड्डा’।
इस मामले में पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा विभाग की कार्यशैली: उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग वर्तमान में भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है।योजनाओं में अनियमितता कमरो ने आरोप लगाया कि केवल आंगनबाड़ी भर्ती ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना और संविदा भर्ती जैसी योजनाओं में भी बड़े स्तर पर अनियमितताएँ हो रही हैं।प्रशासन को चेतावनी उन्होंने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि मामले का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो उच्च स्तर पर शिकायत कर अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी सबकी नजरें।
पूर्व में भी विभाग से संबंधित कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई न होने से आवेदकों में हताशा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाता है।




