मंगलसूत्र के नाम पर ‘धोखा’: सरगुजा की 189 बेटियों के स्वाभिमान पर ‘भ्रष्टाचार का प्रहार’

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सरगुजा/मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB): छत्तीसगढ़ में सुशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच, मनेन्द्रगढ़ से एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई है जिसने महिला सशक्तिकरण की नींव को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, जो गरीब बेटियों के लिए एक सहारा थी, अब महिला एवं बाल विकास विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की ‘अवैध कमाई’ का साधन बन चुकी है।

सबसे बड़ा और दुखद विरोधाभास यह है कि प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े स्वयं इसी सरगुजा संभाग की बेटी हैं। जिस संभाग की बेटी प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण की कमान संभाले बैठी हो, उसी के नाक के नीचे 189 गरीब बेटियों के अरमानों का गला घोंट दिया गया।

चांदी का सपना, ‘लोहे’ की हकीकत

रतनपुर में आयोजित सामूहिक विवाह के दौरान, इन 189 बेटियों को जो मंगलसूत्र दिए गए, वे पवित्रता का प्रतीक नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का ‘कड़वा सच’ बनकर सामने आए। चांदी बताकर दिए गए ये मंगलसूत्र असल में सस्ते और घटिया ‘गिलेट’ (मेटल) के निकले।

विवाह के पवित्र बंधन में बंधने वाली एक नवविवाहिता ने जब मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयां की, तो उनकी आँखें छलक आईं:

“मंत्री जी हमारे ही संभाग की हैं, वो खुद एक महिला हैं। हमें लगा था कि हमारे साथ न्याय होगा, लेकिन उनके राज में अफसरों ने हमारी शादी के पवित्र धागे तक को नहीं बख्शा। चांदी कहकर हमें नकली मेटल पहना दिया गया। यह हमारी गरीबी का मज़ाक है।”

भ्रष्टाचार की ‘नर्सरी’ बन चुका है विभाग

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) लंबे समय से विवादों की जद में रहा है। जानकारों का कहना है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित ‘सिंडिकेट’ का नतीजा है:

भर्ती में धांधली: चहेतों को रेवड़ियों की तरह पद बांटने का आरोप।

सामग्री की गुणवत्ता: साड़ियों से लेकर विवाह किट तक, हर स्तर पर घटिया सामग्री की सप्लाई।

सिंडिकेट राज: पोषण आहार से लेकर मंगलसूत्र तक, अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच का यह गठजोड़ अब गरीब बेटियों के स्वाभिमान को निशाना बना रहा है।

सवाल सीधा ‘मंत्रालय’ से: क्या जागेगा विभाग?

आज 189 पीड़ित बेटियाँ न्याय की आस में रायपुर मंत्रालय की ओर देख रही हैं। प्रदेश की जनता और पीड़ित परिवारों के मन में कुछ तीखे सवाल हैं:

जवाबदेही किसकी?: क्या मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को उनके ही विभाग के अफसरों ने अंधेरे में रखा है? यदि नहीं, तो उनके गृह संभाग में बेटियों के साथ इतना बड़ा छल करने की हिम्मत इन अधिकारियों में कैसे आई?

नोटिस या FIR?: क्या दोषियों के खिलाफ केवल खानापूर्ति के लिए ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी होगा, या गरीब बेटियों के मंगलसूत्र की राशि डकारने वाले इन अधिकारियों और सप्लायरों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा?

स्वाभिमान की भरपाई कब?: इन बेटियों को उनका असली हक यानी शुद्ध चांदी का मंगलसूत्र कब मिलेगा? सरकारी तंत्र को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या वे इन बेटियों के टूटे हुए भरोसे को जोड़ पाएंगे?

यह महज एक विवाह का मामला नहीं है, यह एक सिस्टम की संवेदनहीनता का मामला है। अब देखना यह है कि क्या मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का ‘हंटर’ इन भ्रष्ट अधिकारियों पर चलेगा, या पीड़ित बेटियों की चीखें इसी तरह फाइलों के नीचे दबी रह जाएंगी?

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