MCB/मनेंद्रगढ़: महिला एवं बाल विकास विभाग इन दिनों ‘सेवा’ के बजाय ‘स्कैम’ के अड्डे के रूप में बदनाम होता दिख रहा है। जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की भर्ती प्रक्रिया का जो ताज़ा मामला सामने आया है, उसने न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा दी हैं, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों के सपनों को भी कुचल दिया है।
मेरिट धरी रह गई, अपनों की ‘पर्ची’ चल गई!
आवेदकों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में योग्यता और नियमों को ताक पर रखकर ‘पसंदीदा’ लोगों को उपकृत किया गया है। आरती, कुसुम कली, मीना सिंह और सुमित्रा जैसी दर्जनों आवेदिकाओं ने कलेक्टर के दरबार में गुहार लगाई है कि जहां उन्हें मेरिट में होने के बावजूद दरकिनार किया गया, वहीं कम अंक वालों को ‘पिछले दरवाजे’ से नियुक्ति थमा दी गई। जाति प्रमाण पत्र और गरीबी रेखा कार्ड के अंकों में भी हेराफेरी का गंभीर आरोप है, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि विभाग में सब कुछ ‘ठीक’ नहीं चल रहा।
गुलाब कमरो का तीखा प्रहार: ‘भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया विभाग’
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस मामले को लेकर सरकार और विभाग को सीधे घेरे में लिया है। कमरो का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं।
“मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से लेकर संविदा भर्तियों तक, हर जगह घपले की बू आ रही है। विभाग अब महिला एवं बाल विकास नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचार एवं धांधली’ का अड्डा बन चुका है। क्या प्रशासन अंधा है या भ्रष्टाचार में हिस्सेदार?” – गुलाबकमरो, पूर्व विधायक।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
क्या आवेदकों का दर्द जिला प्रशासन तक पहुँच रहा है? या फिर फाइलें दबाकर मामले को रफा-दफा करने की तैयारी है? आवेदकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
अब सवाल यह है: क्या कलेक्टर इस ‘भ्रष्टाचार के नेक्सस’ को तोड़ पाएंगे, या फिर यह मामला भी पुरानी शिकायतों की तरह फाइलों की धूल में दफन हो जाएगा?




