विकास की जगह ‘वसूली’ का केंद्र बना जनपद।

छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण जनपद पंचायत क्षेत्रों में शुमार बैकुंठपुर, इन दिनों विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण चर्चा में है। यहाँ तैनात दो इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके कारण निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ा है।
ठेकेदारों का दर्द: “काम से पहले चढ़ावा देना मजबूरी”लूतिका मैडम की गहमा गहमी बैकुंठपुर जनपद में।
पीड़ित ठेकेदारों के अनुसार, जनपद पंचायत में नियम-कानूनों की जगह ‘पैसे का खेल’ हावी है। ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि भूमिपूजन से पूर्व मांग कार्य शुरू करने से पहले ही अधिकारियों द्वारा अपने हिस्से का कमीशन मांगा जाता है।
मूल्यांकन और सत्यापन का जाल बिल पास कराने और भौतिक सत्यापन के दौरान इंजीनियरों द्वारा भारी कमीशन की मांग की जाती है, जिससे ठेकेदारों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी।
कमीशनबाजी के इस दौर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पूरी तरह से दांव पर है। ठेकेदारों का कहना है कि जब एक बड़ा हिस्सा ‘साहबों’ की जेब में चला जाता है, तो निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग करना उनकी विवशता बन जाती है, जिसके कारण सरकारी संपत्ति का नुकसान हो रहा है।
कार्यपालन अभियंता की भूमिका पर उठे सवाल।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे गोरखधंधे की जानकारी जनपद के उच्च अधिकारियों और कार्यपालन अभियंता (EE) तक होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्या कार्यपालन अभियंता इन सबके बारे में अनभिज्ञ हैं, या फिर ‘आंखें मूंदकर’ मिलीभगत का खेल खेला जा रहा है? यह मौन चुप्पी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
प्रशासन की कार्यशैली पर भारी दबाव।
बैकुंठपुर के जागरूक नागरिकों और ठेकेदारों के बीच अब यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि इन दो इंजीनियरों के कामकाज की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि प्रशासन ने समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का पैसा इसी तरह भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ता रहेगा।




