पहाड़ों के बीच पहुंची विकास की धारा: जल जीवन मिशन से बदली ढाब की तकदीर

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एमसीबी, 29 मई 2026

​दुर्गम पहाड़ियों, पगडंडियों और सीमित संसाधनों के बीच बसे ग्राम पंचायत खोहरा के आश्रित ग्राम ढाब में अब विकास की एक नई और सुखद धारा बह रही है। जल जीवन मिशन के सफल क्रियान्वयन ने इस गांव की तस्वीर और ग्रामीणों की तकदीर को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करने वाला यह गांव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है।

संघर्ष की दास्तान: जब पानी के लिए पार करनी पड़ती थीं पहाड़ियां

​कुछ समय पहले तक ढाब के ग्रामीणों की पूरी दिनचर्या पानी की तलाश के इर्द-गिर्द घूमती थी। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे रोजाना मीलों पैदल चलकर नदी, दूरदराज के कुओं या हैंडपंपों तक जाने के लिए मजबूर थे। पहाड़ी रास्तों से भारी बर्तनों में पानी ढोना उनके जीवन की सबसे कठिन परीक्षा थी। गर्मी के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती थी, जब प्राकृतिक जल स्रोत सूख जाते थे और ग्रामीणों को पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था।

जल जीवन मिशन बना उम्मीद की किरण

​लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा गांव में संचालित जल जीवन मिशन ने इन कठिन हालातों को बदल दिया है। गांव में विकास की प्रमुख कड़ियाँ इस प्रकार हैं:

  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: गांव में 10 हजार लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी का निर्माण किया गया है।
  • सुदृढ़ पाइपलाइन: पूरे गांव में पाइपलाइन का जाल बिछाया गया है, जिससे प्रत्येक घर तक सीधा नल कनेक्शन पहुंचा है।
  • मोटर पंप की सुविधा: नियमित जलापूर्ति के लिए मोटर पंप स्थापित किए गए हैं, जिससे अब ग्रामीणों को पानी लाने के लिए कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है।

बदलाव: समय की बचत और बेहतर स्वास्थ्य

​पानी की सुलभता ने ग्रामीणों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव किया है। अब घर के पास स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से लोगों का श्रम और कीमती समय बच रहा है। इस बदलाव के सकारात्मक प्रभाव निम्न हैं:

  1. स्वास्थ्य में सुधार: स्वच्छ पानी मिलने से गांव में जलजनित बीमारियों का खतरा न के बराबर हो गया है।
  2. शिक्षा पर सकारात्मक असर: पानी लाने के झंझट से मुक्ति मिलने के बाद अब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होती।
  3. महिलाओं को राहत: महिलाओं के दैनिक श्रम में भारी कमी आई है, जिससे वे अपने परिवार और अन्य कार्यों पर ध्यान दे पा रही हैं।

सामुदायिक सहभागिता का मॉडल

​ढाब में हुए इस बदलाव में ‘ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति’ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। समिति के सदस्य न केवल जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों को जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। गांव में जल स्रोतों की सुरक्षा और पानी के सदुपयोग को लेकर एक नई जन-चेतना विकसित हुई है।

निष्कर्ष

​दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित ढाब गांव ने यह साबित कर दिया है कि यदि सरकारी योजनाओं के साथ मजबूत इच्छाशक्ति और जन-भागीदारी जुड़ जाए, तो विकास की किरण सबसे कठिन रास्तों तक भी पहुंच सकती है। आज यह गांव सामुदायिक सहभागिता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की एक जीवंत मिसाल बन चुका है।

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