मनेंद्रगढ़: छत्तीसगढ़ में तथाकथित ‘डबल इंजन’ सरकार का दावा उस समय हवा-हवाई साबित हो गया, जब नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने प्रदेश के 5 नए मेडिकल कॉलेजों पर तकनीकी ब्रेक लगा दिया। इसमें मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज का नाम शामिल होने से क्षेत्र में भारी आक्रोश है। इस विफलता पर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने तीखा हमला बोलते हुए इसे जनता के साथ “सीधा धोखा” करार दिया है।
कमरो का कड़ा प्रहार: “मंत्रीजी के वादे, और जनता के साथ इरादे साफ नहीं”
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जनता को गुमराह करने का सुनियोजित खेल है।
जुमलेबाजी का आरोप: कमरो ने याद दिलाया कि स्वास्थ्य मंत्री ने बड़े जोर-शोर से दावा किया था कि इस सत्र से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू हो जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि आज स्थिति ‘ढाक के तीन पात’ वाली है।युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ मेडिकल कॉलेज के सपने को आधार मानकर क्षेत्र के युवाओं ने सुनहरे भविष्य की उम्मीदें पाल रखी थीं। कमरो के अनुसार, सरकार की लापरवाही ने इस पूरे अंचल के युवाओं को निराश कर दिया है।
डबल इंजन पूरी तरह ‘डेड’: पूर्व विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार को “डबल इंजन” का नाम दिया गया, वह बुनियादी स्वास्थ्य और शिक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह फेल साबित हुई है।
क्या है पूरा मामला?
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा मनेंद्रगढ़ समेत 5 मेडिकल कॉलेजों पर लगाई गई रोक ने सरकार की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार ने समय रहते बुनियादी ढांचे और औपचारिकताओं को पूरा किया होता, तो आज यह नौबत नहीं आती।
”मंत्रीजी बोलते कुछ हैं और होता कुछ है। मेडिकल कॉलेज के नाम पर जिले की जनता को जिस तरह गुमराह किया गया है, वह अक्षम्य है। यह सिर्फ एक इमारत का सवाल नहीं, बल्कि मनेंद्रगढ़ के स्वास्थ्य भविष्य और युवाओं के सपनों की हत्या है।”— गुलाब कमरो, पूर्व विधायक
निष्कर्ष।
स्वास्थ्य मंत्री के दावों और NMC की रिपोर्ट के बीच फंसी यह स्थिति अब मनेंद्रगढ़ की राजनीति में नया उबाल ला रही है। देखना होगा कि क्या सरकार इस विफलता के लिए कोई ठोस सफाई देती है, या फिर यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े जन-आंदोलन का रूप लेगा।




