एमसीबी (MCB) जिला: झगराखांड थाना क्षेत्र में अवैध सट्टा पट्टी का कारोबार तेजी से अपने पैर पसार रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पंकज और दिवाकर नामक व्यक्ति इस अवैध नेटवर्क के मुख्य संचालक बने हुए हैं, जिन्हें क्षेत्र में ‘सेठों के सेठ’ के रूप में संबोधित किया जाता है। इनके साथ जमालू और डीके नामक अन्य व्यक्ति ‘चिल्लर पार्टी’ के रूप में सक्रिय हैं, जो सट्टा कटिंग का काम बखूबी संभाल रहे हैं।
डिजिटल माध्यमों का हो रहा दुरुपयोग
इस अवैध धंधे का सबसे चिंताजनक पहलू इसका आधुनिकीकरण है। अब सट्टा खेलने या लगवाने के लिए किसी भी गुप्त ठिकाने पर जाने की आवश्यकता नहीं रह गई है। संचालकों ने अपनी पहुँच बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप (WhatsApp) और फोन कॉल का सहारा लिया है। सूत्रों की मानें तो महज एक मैसेज या कॉल के जरिए सट्टे की रकम और नंबर तय किए जा रहे हैं, जिससे पुलिस की पकड़ से बचना इनके लिए आसान हो गया है।
युवा पीढ़ी हो रही बर्बाद
सट्टे के इस अवैध कारोबार का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। छोटी कमाई करने वाले लोग और क्षेत्र के युवा इस जाल में बुरी तरह फंसते जा रहे हैं। कम समय में अमीर बनने का सपना दिखाकर युवाओं को सट्टे की लत लगाई जा रही है, जिसके कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है और युवा गलत रास्ते पर अग्रसर हो रहे हैं।
कानून पर उठे सवाल
झगराखांड थाना अंतर्गत खुलेआम चल रहे इस अवैध कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस डिजिटल सट्टा नेटवर्क पर लगाम नहीं लगाई, तो यह क्षेत्र की शांति और सामाजिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा साबित होगा।
- क्या प्रशासन की नजर इस संगठित नेटवर्क पर है?
- कब होगी ‘सेठों के सेठों’ और उनके गुर्गों पर कड़ी कार्रवाई?




