
कोरिया जिले के ग्राम जिल्दा स्थित आदिम जाति सहकारी समिति में हुए खाद घोटाले के बाद जिला प्रशासन का जिले में शक्ति लाज़मी है लेकिन इसके बाबजूद भी कई ऐसे सहकारी समिति है जहां सूत्रों के हवाले से उर्वरक घोटाले की बू आज भी आ रही है।
दरअसल ग्राम जिल्दा में उर्वरक की मात्रा में भारी कमी जांच में सामने आई। किसानों की माने तो लंबे समय से प्रबंधक द्वारा किसानों को खाद की उपलब्धता की कमी का सामना करना पड़ता था जबकि सरकार और प्रशासन पर्याप्त मात्रा में खाद बीज उपलब्ध करा रही थी। जिल्दा सहकारी समिति के मामले में पहले मीडिया फिर जनदर्शन में उठे सवाल पर विधायक को स्वयं आगे आकर कार्यवाही करानी पड़ी और शिकायत सही पाई गईं जांच के बाद प्रबंधक पर पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज हुई लेकिन सवाल यही है कि क्या इसके बाद भी जिले की समितियां अब भी नियम निर्देशों का पालन पूर्ण रूप से कर रही है तो जवाब ना में मिलता है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि जिले के सोनहत और बैकुंठपुर की कुछ समितियां आज भी किसानों के साथ चूहे बिल्ली का खेल खेल रही है। उधर कलेक्टर महोदय अलग ही बात करती है कोरिया कलेक्टर ने बताया कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसानों को नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से खाद वितरण सुनिश्चित किया जाए। इसी को लेकर जिला प्रशासन पूरी सख्ती के साथ काम कर रहा है। जिले के सभी समिति प्रबंधकों की बैठक लेकर केपीसीसी द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों की समीक्षा की गई और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि अंतिम छोर पर बैठे किसानों तक भी नियमानुसार खाद पहुंचे।




