- भाजयुमो महामंत्री मानोज साहू ने डीएफओ कोरिया को सौंपा शिकायत पत्र, कड़ी कार्यवाही की रखी मांग
- कार्यवाही नही होने पर कोरिया जन सहयोग समिति ने भी दी आंदोलन की चेतावनी
- जनता का उठ रहा वन विभाग से भरोसा: बेशकीमती वन संपदा की खुली लूट पर आखिर कब टूटेगा विभाग का मौन ?
- एसी कमरों और पक्की सड़कों तक सिमटी गश्त: सुरक्षा का जिम्मा सिर्फ एक बीट गार्ड के भरोसे छोड़ चैन की नींद सोया वन अमला
- मुख्यालय की नाक के नीचे कटी ‘साख’: फेंसिंग के भीतर जब सुरक्षित नहीं चंदन, तो भगवान भरोसे हैं जंगल!
प्रदीप पाटकर।
सोनहत/बैकुंठपुर। वन विभाग के दावों और मैदानी सुरक्षा की पोल खोलती एक बेहद सनसनीखेज खबर सोनहत से सामने आई है। विकासखंड मुख्यालय स्थित जिस ‘स्थायी रोपणी’ (शासकीय नर्सरी) को सबसे सुरक्षित माना जाता है, वहां घुसकर चंदन माफियाओं ने आधा दर्जन (छह) बेशकीमती और वयस्क चंदन के पेड़ों पर धड़ल्ले से आरा चला दिया। मुख्यालय के ठीक नाक के नीचे हुई इस दुस्साहसिक वारदात ने कोरिया वनमण्डल की सुरक्षा व्यवस्था के परखच्चे उड़ा दिए हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि इस गंभीर चोरी की भनक वन विभाग के आला अधिकारियों को तब लगी, जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेताओं ने खुद नर्सरी के भीतर जाकर कटे हुए पेड़ों की तस्दीक की। इस बड़ी लापरवाही के बाद अब समूचे वन महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
*’भगवान भरोसे’ जंगल: जब मुख्यालय की नर्सरी ही सुरक्षित नहीं*
यह वारदात सीधे तौर पर कोरिया वनमण्डल की साख पर एक बड़ा तमाचा है। सवाल उठना लाजिमी है कि जब जिला और ब्लॉक मुख्यालय से सटी वीआईपी शासकीय नर्सरी के भीतर ही पेड़ सुरक्षित नहीं हैं, जहां बाकायदा फेंसिंग और स्टाफ की तैनाती के दावे किए जाते हैं, तो फिर दूरस्थ वनांचलों, घने जंगलों और बेजुबान वन्यजीवों की सुरक्षा की क्या स्थिति होगी? चंदन माफियाओं ने जिस बेखौफ अंदाज में इस वारदात को अंजाम दिया है, उसने साबित कर दिया है कि उन्हें वन विभाग की सुरक्षा का कोई खौफ नहीं रह गया है।
*डिप्टी रेंजर की भूमिका पर गंभीर सवाल: मुख्य सड़कों तक सीमित है गश्त?*
इस पूरे मामले में स्थानीय वनक्षेत्रपाल एवं वन परिक्षेत्राधिकारी की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं। जमीनी सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, वन क्षेत्रपाल एवं परिक्षेत्राधिकारी अक्सर अपने निर्धारित सर्कल और संवेदनशील बीटों से नदारद रहते हैं। वनांचलों का पैदल या अंदरूनी निरीक्षण करने के बजाय उनकी मौजूदगी सिर्फ मुख्य पक्की सड़कों तक ही सीमित दिखाई देती है।
हद तो तब हो गई जब इतने संवेदनशील और बेशकीमती चंदन के पेड़ों की सुरक्षा का पूरा जिम्मा महज एक बीट गार्ड के भरोसे छोड़कर अधिकारियों ने अपनी पदीय जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया। जानकारों का कहना है कि मुख्यालय के भीतर से भारी-भरकम चंदन के वयस्क पेड़ों का कटकर गायब हो जाना बिना किसी स्थानीय साठगांठ या ‘उच्च संरक्षण’ के मुमकिन ही नहीं है। इस पूरी वारदात में विभागीय मिलीभगत और माफियाओं के गठजोड़ की बू आ रही है।
*भाजयुमो मंडल महामंत्री मनोज साहू ने सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी*
नर्सरी के भीतर जब अवैध कटाई की सुगबुगाहट आम हुई, तो भाजयुमो के मंडल महामंत्री मनोज साहू के नेतृत्व में युवा मोर्चा की टीम सुरेश राजवाड़े, दिलीप राजवाड़े टिकेश्वर,राजवाड़े उमा,राजवाड़े राजू साहू , ललन ,रविंद्र ने खुद ग्राउंड जीरो पर जाने का फैसला किया। भाजयुमो नेताओं ने शासकीय नर्सरी के भीतर जाकर बकायदा उन ठूंठों और कटे हुए हिस्सों की पुष्टि की, जहां से चंदन के पेड़ गायब किए गए थे।
इस खुली लूट के खिलाफ आक्रोश जताते हुए भाजयुमो मंडल महामंत्री मनोज साहू ने वनमण्डलाधिकारी वनमण्डल कोरिया (बैकुंठपुर) को एक बेहद तीखा और कड़ा शिकायती पत्र/ज्ञापन सौंपा है।
*उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच:* सोनहत स्थायी रोपणी से हुई इस बेशकीमती चंदन चोरी के मामले की तत्काल प्रभाव से किसी उच्च स्तरीय टीम से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
*लापरवाह वन क्षेत्रपाल को हटाने की मांग:* कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने और मुख्यालय में बैठकर माफियाओं को मूक संरक्षण देने के संदेही वनक्षेत्रपाल को तत्काल प्रभाव से सोनहत से हटाकर अन्यत्र संलग्न किया जाए, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।
*दंडात्मक कार्यवाही:* इस पूरे मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और बीट गार्ड की भूमिका की सूक्ष्मता से जांच कर उनके खिलाफ कड़ी वैधानिक व दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
भाजयुमो ने साफ चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग की साख को बट्टा लगाने वाले इस गंभीर मामले में अविलंब कड़े कदम नहीं उठाए गए और दोषियों पर कार्यवाही नही हुई तो युवा मोर्चा वन विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। अब देखना यह है कि डीएफओ कोरिया इस खुली लापरवाही पर क्या हंटर चलाते हैं या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
*पहले साल… फिर सागौन… और अब सीधे चंदन! आखिर किसका है संरक्षण?”*
सोनहत वन परिक्षेत्र में लगातार हो रही इस प्राकृतिक डकैती ने अब यह बड़ा सवाल हवा में उछाल दिया है। स्थानीय जानकारों की मानें तो यह कोई पहली वारदात नहीं है, बल्कि कीमती वन संपदा को ठिकाने लगाने का एक पूरा क्रोनोलॉजिकल (क्रमबद्ध) खेल चल रहा है। पहले जंगलों से ‘साल’ की बेशकीमती लकड़ियां गायब हुईं, फिर तस्करों की नजर ‘सागौन’ पर टिकी और अब हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि सीधे सरकारी फेंसिंग को लांघकर ‘चंदन’ के वयस्क पेड़ों पर आरा चला दिया गया। आखिर वन विभाग का वह कौन सा ‘रसूखदार’ हाथ है, जिसकी शह पर ये तस्कर बेखौफ होकर इतनी बड़ी चोरियों को अंजाम दे रहे हैं? जिस रफ्तार से रेंजर की नाक के नीचे से सरकारी खजाना लूटा जा रहा है, उसने यह साफ कर दिया है कि यह सिर्फ एक बीट गार्ड की लापरवाही नहीं, बल्कि विभागीय सांठगांठ का एक बहुत बड़ा ‘सिंडिकेट’ है जो पर्दे के पीछे से काम कर रहा है।
*यह सिर्फ चोरी नहीं, सोनहत वन विभाग के ‘विभागीय सिंडिकेट’ का जीवंत प्रमाण है” — मनोज साहू*
यह सिर्फ चंदन के पेड़ों की चोरी नहीं है, बल्कि सोनहत वन परिक्षेत्र में लंबे समय से फल-फूल रहे एक बहुत बड़े ‘विभागीय सिंडिकेट’ का जीवंत प्रमाण है। पहले जंगलों से साल गायब हुआ, फिर सागौन पर आरा चला और अब तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरकारी नर्सरी के भीतर घुसकर चंदन के वयस्क पेड़ काटकर ले जा रहे हैं। जब मुख्य ब्लॉक मुख्यालय की फेंसिंग के अंदर सरकारी संपत्ति सुरक्षित नहीं है, तो दूरस्थ जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा का दावा खोखला है। स्थानीय वन क्षेत्रपाल व रेंजर अपनी जिम्मेदारी एक छोटे कर्मचारी (बीट गार्ड) के मत्थे मढ़कर खुद मुख्य सड़कों पर सैर-सपाटा कर रहे हैं। बिना किसी उच्च संरक्षण या विभागीय साठगांठ के इतनी बड़ी वारदात मुमकिन ही नहीं है। हमने डीएफओ महोदय को ज्ञापन सौंपकर इस ‘चंदन कांड’ की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और लापरवाह रेंजर को तत्काल प्रभाव से सोनहत से हटाने की मांग की है। अगर वन विभाग ने अपनी साख बचाने के लिए दोषियों पर तत्काल वैधानिक और दंडात्मक कार्यवाही नहीं की, तो भारतीय जनता युवा मोर्चा चुप नहीं बैठेगा। हम सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वन प्रशासन की होगी।”
*कार्यवाही नही हुई तो करेंगे वन विभाग का घेराव- पुष्पेंद्र*
कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र राजवाड़े ने कहा कि जिस सोनहत शासकीय नर्सरी को वन विभाग सबसे सुरक्षित होने का ढोल पीटता है, वहां से चंदन के वयस्क पेड़ों का साफ हो जाना कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे ‘सरकारी डकैती’ है। जब डिप्टी रेंजर , रेंजर और आला अधिकारियों की नाक के नीचे, जिला मुख्यालय से सटी फेंसिंग के भीतर सरकारी संपत्ति सुरक्षित नहीं है, तो सुदूर जंगलों के भगवान भरोसे होने पर कोई शक नहीं रह जाता।
कोरिया जन सहयोग समिति मांग करती है कि क्षेत्र में लगातार हो रही साल, सागौन और अब चंदन की तस्करी के जांच हो और जिम्मेदार लापरवाह डिप्टी रेंजर से लेकर रेंजर तक तत्काल कड़ी वैधानिक कार्यवाही हो , कार्यवाही नही होने पर वन विभाग का घेराव किया जाएगा




