ओड़गी-कंदाबारी में ‘जुए का दरबार’: वर्दी की नाक के नीचे चल रहा ’52 परी’ का खेल, पुलिस बनी मूकदर्शक!

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बैकुंठपुर/ओड़गी/कंदाबारी: कहावत है कि ‘चोर की दाढ़ी में तिनका’, लेकिन ओड़गी और कंदाबारी के इन इलाकों में तो ऐसा लगता है कि पूरी की पूरी ‘जुआरियों की बारात’ पुलिस की आंखों के सामने निकल रही है, और खाकी को भनक तक नहीं है! या शायद, भनक तो है, पर ‘पकड़’ ढीली है?

पुलिस की ‘स्मार्ट’ नाकामी!

​ओड़गी के कंदाबारी, कटोली पारा, धौराटिकरा और चेर—इन गांवों की गलियों में विकास की चर्चाएं भले ही सुनाई न दें, लेकिन ’52 परी’ के जुए की धमक दूर-दूर तक गूंज रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जुआरियों ने अपनी जगह बदलने में जो ‘हुनर’ दिखाया है, अगर वही हुनर पुलिस अपराधियों को पकड़ने में दिखाती, तो आज इन इलाकों की तस्वीर कुछ और होती।

​हैरानी इस बात की है कि रात के अंधेरे में हजारों-लाखों के दांव लग रहे हैं, बस्तियां उजड़ रही हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। क्या ओड़गी पुलिस का इंटेलिजेंस फेल है, या फिर यह ‘सेटिंग’ का कोई नया खेल है?

रसूखदार ‘खिलाड़ियों’ का संरक्षण?

​चर्चा यह भी आम है कि इन फड़ों पर कुछ ‘खास’ लोगों का हाथ है। जब भी जुए की बात उठती है, तो स्थानीय जनता के मुंह से एक ही बात निकलती है—“साहब, उन पर हाथ कौन डाले? उनकी पहुँच तो ऊपर तक है।”

​अगर यह बात जनता की जुबान पर है, तो क्या पुलिस का इकबाल इतना कमजोर हो चुका है कि उसे रसूखदारों के नाम से डर लगता है? या फिर ‘ऊपर की कमाई’ का गणित इतना सटीक है कि वर्दी अपनी जिम्मेदारी भूल चुकी है? पुलिस प्रशासन की यह खामोशी, जुआरियों के हौसलों की सबसे बड़ी ईंधन है।

युवाओं को ‘किस्मत’ के दलदल में धकेलती खाकी

​जुआ केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक सामाजिक कैंसर है जो कंदाबारी के युवाओं को बर्बाद कर रहा है। मेहनत की रोटी छोड़ ‘शॉर्टकट’ के चक्कर में फंसते युवा, आने वाले समय में समाज के लिए बोझ बन जाएंगे। इस विनाशकारी खेल को फलने-फूलने देना, सीधे तौर पर पुलिस की नैतिक हार है।

अब वर्दी को दिखानी होगी ‘सच्ची फुर्ती’

​प्रशासन अब तक जो ‘कुंभकर्णी नींद’ सो रहा है, उसे तोड़ने का वक्त आ गया है। ओड़गी की जनता अब और बहाने सुनने को तैयार नहीं है।

  • सवाल सीधा है: क्या ओड़गी पुलिस के पास इतनी हिम्मत है कि वह उन रसूखदारों के गिरेबान तक हाथ पहुंचा सके जो इन फड़ों को पनाह दिए हुए हैं?
  • चैलेंज: क्या आने वाले 24-48 घंटों में इन अड्डों पर ताले लगेंगे, या फिर ये रिपोर्ट भी फाइलों के ढेर में दफन हो जाएगी?

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