रायपुर: एमसीबी जिले में अल्प मानदेय पर दिन-रात सेवा दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब अपना हक मांगने के लिए पूर्व विधायक गुलाब कमरो का मजबूत सहारा मिल गया है। कार्यकर्ताओं की लंबित प्रोत्साहन राशि और सुपोषण चौपाल के भुगतान को लेकर पूर्व विधायक ने सीधे महिला एवं बाल विकास सचिव से मोर्चा ले लिया है।
क्या है पूरा मामला?
मनेंद्रगढ़ परियोजना के अंतर्गत कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का महीनों से भुगतान अटका हुआ है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सचिव से मुलाकात कर दो टूक शब्दों में कहा है कि मेहनत का पैसा न मिलना घोर लापरवाही है।
लंबित भुगतान की स्थिति।
पोषण ट्रैकर ऐप: जून 2024 से फरवरी 2025 और मार्च 2026 से मई 2026 तक की प्रोत्साहन राशि लंबित।सुपोषण चौपाल: सितंबर 2024 से फरवरी 2025 और मार्च 2026 से मई 2026 तक का भुगतान बकाया।”इंटरनेट का पैसा भी जेब से भर रही कार्यकर्ता”
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि, “ये कार्यकर्ता पहले ही बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं। ऊपर से पोषण ट्रैकर ऐप के लिए इंटरनेट रिचार्ज और अन्य खर्चों का बोझ भी इन्हीं पर है। शासन की उदासीनता के कारण इन्हें अपने ही हक के पैसे के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।”
आर-पार की चेतावनी।
कमरो ने सचिव महोदया को सौंपे गए पत्र में साफ कर दिया है कि कार्यकर्ताओं के धैर्य की परीक्षा न ली जाए। उन्होंने तत्काल प्रभाव से लंबित राशियों का भुगतान करने की मांग की है ताकि महंगाई के इस दौर में इन बहनों को आर्थिक राहत मिल सके।
“आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत का पैसा सरकार को हर हाल में देना ही होगा। यदि लंबित भुगतान में और देरी हुई, तो इसका जवाब सरकार को देना पड़ेगा।” – गुलाब कमरो, पूर्व विधायक




