कोरिया, 2 जून 2026: जिले में खरीफ सीजन 2026-27 के लिए किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने हेतु जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरकों के सुचारु वितरण और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।
उर्वरक वितरण: लक्ष्य के मुकाबले उल्लेखनीय प्रगति
उप संचालक कृषि श्री राजेश भारती ने बताया कि 1 जून 2026 तक उर्वरकों के वितरण में बेहतर प्रगति दर्ज की गई है। जिले में कुल 12,150 मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 6,196 मीट्रिक टन खाद किसानों तक पहुंचाई जा चुकी है। एक ही दिन में 666 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण कर प्रशासन ने बुवाई की तैयारियों को गति प्रदान की है।
डबल लॉक केंद्रों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध
किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए डबल लॉक केंद्रों में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण रखा गया है। वर्तमान में इन केंद्रों में कुल 1,883.969 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जिसमें मुख्य रूप से यूरिया (1,325.610 मीट्रिक टन), डीएपी (390.900 मीट्रिक टन), एनपीके (60 मीट्रिक टन) और एमओपी (107.450 मीट्रिक टन) शामिल है।
कलेक्टर के सख्त निर्देश: कालाबाजारी करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- पारदर्शी वितरण: खाद का वितरण केवल पीओएस (POS) मशीन के माध्यम से ही किया जाए।
- सक्रिय उड़नदस्ता: कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर नजर रखने के लिए उड़नदस्ता दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
- दंडात्मक कार्यवाही: नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं और संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
नैनो यूरिया का उपयोग और संतुलित खेती पर जोर
कृषि विभाग ने किसानों को पारंपरिक यूरिया के साथ-साथ ‘नैनो यूरिया’ के उपयोग के लिए प्रेरित किया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, नैनो यूरिया कम लागत में अधिक प्रभावी परिणाम देता है और मिट्टी की गुणवत्ता को भी सुरक्षित रखता है। साथ ही, किसानों को डीएपी और यूरिया के संतुलित उपयोग की सलाह दी गई है ताकि भूमि की उर्वरक शक्ति बनी रहे।
किसानों से विभाग की अपील
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि:
- वे अपनी आवश्यकतानुसार ही खाद का उठाव करें।
- केवल लाइसेंसधारी विक्रेताओं और सहकारी समितियों से ही खाद खरीदें।
- खरीद के समय पीओएस मशीन से रसीद अवश्य प्राप्त करें।
इस पहल के माध्यम से प्रशासन का लक्ष्य खरीफ सीजन के दौरान किसी भी किसान को खाद की कमी न होने देना और खेती की लागत को कम करना है।




