राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे विशेष: दिव्यांगता को मात देकर सुदूर वनांचल के अंतिम व्यक्ति तक उत्तम इलाज पहुंचाने में जुटे ‘कर्मयोगी’; मेडिकल कॉलेज से लेकर जमीनी योजनाओं तक हर मोर्चे पर रच रहे नया इतिहास
प्रदीप पाटकर।मनेंद्रगढ़
कहते हैं कि इरादे अगर फौलादी हों, तो शारीरिक अक्षमता कभी रुकावट नहीं बन सकती। इस बात को अक्षरशः सच साबित कर दिखाया है नवगठित जिले मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अविनाश खरे ने। विपरीत हालातों से लड़कर व्यवस्था को नई दिशा दे रहे डॉ. खरे आज जिले के स्वास्थ्य महकमे के लिए एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं।
मिशन मोड पर मेडिकल कॉलेज: हर ईंट और हर बारीकी पर खुद रख रहे पैनी नजर
नवगठित जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत ढांचा तैयार करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट जिले का बहुप्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज है। डॉ. अविनाश खरे इस प्रोजेक्ट को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा कराने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। अपनी शारीरिक सीमाओं को दरकिनार कर, वे खुद लगातार निर्माण स्थल पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लेते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य है कि जल्द से जल्द स्थानीय वनांचल क्षेत्र के आदिवासियों और ग्रामीणों को इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ न लगानी पड़े।
कागजों से निकलकर धरातल पर उतरीं योजनाएं, टीम में भरा नया उत्साह
डॉ. खरे के कुशल प्रशासनिक नेतृत्व का ही नतीजा है कि जिले में मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना और आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे जनता तक पहुंच रही हैं। भरतपुर जैसे दूरस्थ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में डॉक्टरों की समय पर मौजूदगी और जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। विभाग के कर्मचारी बताते हैं कि डॉ. खरे का कार्य करने का अंदाज इतना सकारात्मक है कि पूरी टीम में एक नई ऊर्जा का संचार हो जाता है।
MCB जिले में स्वास्थ्य क्रांति का रोडमैप
- ग्राउंड ज़ीरो मॉनिटरिंग: मेडिकल कॉलेज निर्माण की कमान खुद संभाली, ताकि काम में पारदर्शिता और तेजी रहे।
- लास्ट माइल डिलीवरी: सुदूर आदिवासी अंचलों के हाट-बाजारों तक डॉक्टरों की टीम और मुफ्त दवाइयों की पहुंच।
- 24/7 उपलब्धता: दूरस्थ अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति की कड़ा रूटीन चेकअप।
सलाम है इस सेवाभाव को!

एक ऐसे दौर में जहां जरा सी परेशानी आने पर लोग व्यवस्था को दोष देकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं, वहां डॉ. अविनाश खरे की यह कर्तव्यनिष्ठा पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है। डॉक्टर्स डे पर यह केवल एक डॉक्टर की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे ‘कर्मयोगी’ की गाथा है जो अपनी शारीरिक सीमाओं को पीछे छोड़कर पूरे जिले की सेहत सुधारने का बीड़ा उठाए हुए है। ‘आदित्य भारत’ इस अटूट प्रतिबद्धता को सलाम करता है।
“शारीरिक चुनौती केवल शरीर की होती है, मन और संकल्प की नहीं। मेरा मकसद सिर्फ एक है—मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति तक बेहतर, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचे।”
— डॉ. अविनाश खरे, सीएमएचओ (MCB)




