
रायपुर, 29 मई 2026/छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारियों के लिए शुरू की गई ₹6 लाख की निःशुल्क लाइफ इंश्योरेंस योजना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राज्य सरकार के महिला सशक्तिकरण के संकल्प को मजबूती देने वाला एक बड़ा कदम है।
स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं ‘महिलाएं’।
एनएचएम के अंतर्गत कार्य करने वाले मैदानी अमले में एक बड़ी संख्या हमारी महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, एएनएम (ANM) और स्टाफ नर्सों की है। ये वे महिलाएं हैं जो दुर्गम क्षेत्रों में जाकर स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुँचाती हैं। सरकार का यह निर्णय सीधे तौर पर इन महिलाओं के कार्यस्थल पर आत्मविश्वास और उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षा प्रदान करता है।
आर्थिक संबल: सुरक्षा का कवच।
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के इस निर्णय का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि यह ‘सामाजिक सुरक्षा’ की गारंटी देता है। एक महिला जो परिवार का भरण-पोषण कर रही है, उसके लिए ₹6 लाख का निःशुल्क लाइफ टर्म इंश्योरेंस किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है।आर्थिक निर्भरता यह योजना महिला कर्मियों को यह भरोसा दिलाती है कि किसी भी अनहोनी की स्थिति में उनके परिवार को दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा।बगैर अतिरिक्त बोझ सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इस सुविधा के लिए सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ रहा, जो दर्शाता है कि सही प्रबंधन और बैंक ऑफ इंडिया के साथ रणनीतिक साझेदारी (MOU) से जन-कल्याणकारी योजनाओं को कैसे लागू किया जा सकता है।
सशक्तिकरण का नया आयाम।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल शिक्षा या रोजगार नहीं है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित कामकाजी वातावरण प्रदान करना भी है। जब सरकार अपने महिला कर्मचारियों के भविष्य की चिंता करती है, तो उनके कार्य करने की क्षमता और मनोबल में स्वतः ही वृद्धि होती है।एनएचएम की महिला कर्मचारी अब पहले से अधिक मानसिक सुकून के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगी। स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल की यह पहल निश्चित रूप से राज्य के सरकारी तंत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए एक ‘सुरक्षा चक्र’ के रूप में काम करेगी, जिससे न केवल उनका बल्कि उनके पूरे परिवार का जीवन संवर सकेगा।




