
कोरिया/सोनहत: ग्राम पंचायत सोनहत की कुर्सी पर काबिज सरपंच साहिबा तो सिर्फ नाम की हैं, असली ‘रिमोट कंट्रोल’ तो उनके पतिदेव के हाथों में है! अपनी ही पंचायत में ‘रबड़ स्टैंप’ बनकर रह गए पंचों का सब्र का बांध आखिरकार टूट ही गया है। अब खबर यह है कि सरपंच के खिलाफ अविश्वास का ऐसा बिगुल बजा है कि सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
‘मैडम सरपंच’ नहीं, ‘मिस्टर पति’ का चलता है सिक्का!
पंचों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के दफ्तर में सरपंच की मौजूदगी तो होती है, लेकिन फाइलें पतिदेव साइन करते हैं। हद तो तब हो गई जब पंचायत की बैठकों में भी सरपंच खामोश रहती हैं और उनके पतिदेव हुक्म चलाते हैं। पंचों का कहना है कि पंचायत भवन अब जनसेवा का केंद्र नहीं, बल्कि ‘पति-देव’ का प्राइवेट ऑफिस बनकर रह गया है।
‘भूमिपूजन’ से लेकर ‘वित्तीय खेल’ तक, सब कुछ सवालों के घेरे में।
नाराज पंचों ने जो बवंडर खड़ा किया है, उसके पीछे कुछ चटपटे कारण हैं हक का भूमिपूजन सरकारी गाइडलाइंस को धता बताते हुए, निर्माण कार्यों का भूमिपूजन सरपंच नहीं, बल्कि उनके पतिदेव बड़े तामझाम के साथ करते हैं।पर्दे के पीछे का खेल योजनाओं की जानकारी पंचों से सात ताले के पीछे रखी जाती है। पारदर्शिता तो जैसे शब्दकोश से ही गायब हो गई है।वित्तीय गड़बड़ी की गंध बजट का पैसा कहाँ खर्च हो रहा है, इसका हिसाब किसी को नहीं पता। पंचों को लग रहा है कि सरकारी खजाने पर ‘डाका’ डाला जा रहा है।
एसडीएम ऑफिस तक पहुँचा ‘विद्रोह’।
सोनहत पंचायत के कुल 20 में से 16-17 पंचों ने एकजुट होकर बगावत की ऐसी पटकथा लिखी है कि सरपंच साहिबा के पसीने छूटने तय हैं। इन पंचों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर साफ कह दिया है— “अब और नहीं!”
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम का डंडा लेकर उतरे इन पंचों ने मांग की है कि अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए और सरपंच की मनमानी पर ताला जड़ा जाए।अब सियासत का पारा चढ़ा हुआ है। क्या पतिदेव के ‘दबदबे’ के आगे पंचों की ‘एकता’ जीतेगी? या फिर जोड़-तोड़ की राजनीति में यह अविश्वास प्रस्ताव हवा हो जाएगा? सोनहत की जनता अब बस यह देखने का इंतजार कर रही है कि अगली ‘मुलाकात’ में कुर्सी बचती है या फिर सरपंच साहिबा की विदाई की तैयारी शुरू होती है!




