सफाई, सड़क, नाली और पेयजल की बदहाली पर उठी आवाज, पालिका के भीतर से विरोध ने बढ़ाई हलचल
जनता परेशान, जिम्मेदार बेखबर? अब जवाबदेही तय करने की मांग तेज
मनेन्द्रगढ़। नगर पालिका मनेन्द्रगढ़ की कार्यप्रणाली को लेकर अब विरोध की आवाज बाहर ही नहीं, बल्कि पालिका के भीतर से भी उठने लगी है। शहर की मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर नगर पालिका उपाध्यक्ष द्वारा सवाल खड़े किए जाने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सफाई व्यवस्था, नालियों, सड़कों और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठ रही शिकायतों ने पालिका की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
शहरवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर की व्यवस्थाओं की निगरानी और सुधार की जिम्मेदारी किसकी है? जब निर्वाचित पदाधिकारी ही व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो आम नागरिकों की शिकायतों की सुनवाई और उनके समाधान की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
सफाई व्यवस्था बनी सवालों के घेरे में
मनेन्द्रगढ़ में सफाई व्यवस्था को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर नियमित सफाई और कचरा उठाव व्यवस्था को लेकर नागरिकों की नाराजगी बताई जा रही है। स्वच्छता के दावों के बीच यदि शहरवासियों को गंदगी और अव्यवस्था से जूझना पड़ रहा है तो पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है।
सड़कों के गड्ढे पूछ रहे विकास का हिसाब
शहर की सड़कों पर गड्ढों को लेकर भी नागरिकों की परेशानी सामने आती रही है। बारिश के मौसम में सड़क के गड्ढे हादसों का खतरा बढ़ाने के साथ आवागमन में भी मुश्किल पैदा करते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि सड़क मरम्मत और रखरखाव की व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है।
पेयजल को लेकर भी उठे सवाल
हाल के दिनों में दूषित जल आपूर्ति को लेकर शिकायतों ने भी चिंता बढ़ाई है। पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में लापरवाही का आरोप गंभीर मामला है। नागरिकों की मांग है कि पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच हो और यदि कहीं समस्या है तो उसका तत्काल निराकरण किया जाए।
नालियों और जल निकासी की स्थिति पर भी निगाह
बारिश के दौरान नालियों और जल निकासी की व्यवस्था की असल तस्वीर सामने आती है। यदि नालियों की नियमित सफाई और पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होगी तो जलभराव और गंदगी की समस्या बनी रहेगी। नागरिक अब स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
पालिका के भीतर से विरोध ने बढ़ाई चुनौती
उपाध्यक्ष के तेवरों ने पूरे मामले को महज आम शिकायत से आगे बढ़ाकर पालिका की कार्यप्रणाली पर बहस का विषय बना दिया है। सवाल अब यह भी है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर पालिका प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और जनता को राहत कब मिलती है।
जनता का सीधा सवाल—जवाबदेही किसकी?
नगर पालिका की जिम्मेदारी केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर दिखाई देना भी जरूरी है। सड़क, सफाई, पेयजल और नाली जैसी सुविधाओं में लगातार शिकायतें सामने आती हैं तो जिम्मेदारी तय करने की मांग स्वाभाविक है।
मनेन्द्रगढ़ की जनता अब आश्वासन नहीं, परिणाम चाहती है। उपाध्यक्ष के विरोध के बाद पालिका प्रशासन के सामने सवालों की लंबी फेहरिस्त खड़ी है। अब देखना होगा कि इन सवालों का जवाब सिर्फ बयानबाजी से दिया जाता है या शहर की बदहाल व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए वास्तव में कोई ठोस और समयबद्ध कार्रवाई होती है।






