चौकीदार से प्रभारी लेखापाल तक का सफर,,,सीनियर लेखापाल मौजूद, फिर जूनियर को प्रभार क्यों? स्वास्थ्य विभाग को जवाब देना होगा

Share this post:

कोरियाकिसी भी सरकारी विभाग की विश्वसनीयता केवल भवन, फाइलों और पदनामों से नहीं, बल्कि नियम, पारदर्शिता और जवाबदेही से तय होती है। कोरिया स्वास्थ्य विभाग में प्रभारी लेखापाल की जिम्मेदारी को लेकर उठ रहे सवाल इसी व्यवस्था की परीक्षा हैं।मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि विभाग में कई वरिष्ठ एवं अनुभवी लेखापाल पदस्थ होने के बावजूद जूनियर कर्मचारी को प्रभारी लेखापाल का दायित्व दिए जाने की बात सामनेरही हैइससे भी बड़ा सवाल उस कर्मचारी की सेवा यात्रा को लेकर है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि चौकीदार पद से सीधे प्रभारी लेखापाल की जिम्मेदारी तक पहुंचाया गया।यहां सवाल किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत योग्यता पर टिप्पणी करने का नहीं, बल्कि प्रक्रिया की पारदर्शिता का हैयदि संबंधित कर्मचारी को नियमों के तहत यह जिम्मेदारी मिली है तो विभाग को संबंधित आदेश, पात्रता और प्रक्रिया स्पष्ट करने में संकोच नहीं होना चाहिए। आखिर सरकारी पद पर जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया जितनी स्पष्ट होगी, उतना ही विभाग पर जनता का भरोसा मजबूत होगा

सीनियरों की मौजूदगी में जूनियर को प्रभार क्यों?

सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब जिले में वरिष्ठ लेखापाल उपलब्ध हैं, तो प्रभारी लेखापाल का दायित्व जूनियर कर्मचारी को सौंपने का आधार क्या रहा? क्या वरिष्ठता, योग्यता और अनुभव का परीक्षण किया गया? किस अधिकारी ने आदेश जारी किया? और इस निर्णय के पीछे प्रशासनिक आवश्यकता क्या थी?इन सवालों को नजरअंदाज करने के बजाय दस्तावेजों के आधार पर जवाब देना ही बेहतर प्रशासन की पहचान होगी।

विभागीय जांच से ही दूध का दूध, पानी का पानी

मामले में स्थानीय स्तर पर कुछ छुटभैया नेताओं के संरक्षण की चर्चाएं भी बताई जा रही हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। लेकिन यदि ऐसी चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं तो विभागीय प्रशासन के लिए इन्हें गंभीरता से लेकर तथ्य सामने रखना जरूरी है।एक निष्पक्ष जांच में संबंधित कर्मचारी की मूल पदस्थापना, सेवा अभिलेख, शैक्षणिक योग्यता, पदोन्नति अथवा प्रभार संबंधी आदेश और वर्तमान जिम्मेदारी की जांच हो सकती है। इससे विवाद भी समाप्त होगा और यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है तो वह भी सामने आएगी।

सवाल छोटा नहीं, व्यवस्था की विश्वसनीयता का है

लेखापाल की जिम्मेदारी महज एक कुर्सी या पदनाम नहीं है। इससे विभागीय वित्तीय कार्य और महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व जुड़े होते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि ऐसी जिम्मेदारी स्पष्ट नियम और सक्षम आदेश के आधार पर ही सौंपी जाए।अब गेंद स्वास्थ्य विभाग के पाले में है। या तो विभाग दस्तावेज सामने रखकर पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करे, या फिर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच कराए।क्योंकि सवाल केवल यह नहीं कि चौकीदार से प्रभारी लेखापाल तक सफर कैसे हुआ—सवाल यह है कि सीनियर लेखापालों की मौजूदगी में जूनियर को यह जिम्मेदारी देने का आधार आखिर क्या था?

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

खबरें और भी हैं...

Advertisement Box

लाइव क्रिकट स्कोर

Gold and Silver price

मौसम अपडेट

राशिफल

© 2026 Chhattisgarh Dabang News  – All rights reserved. | News Website Development Services | New Traffic tail

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x