कलेक्टर को पत्र सौंपकर 22 वार्डों की समस्याओं से कराया अवगत, बंद स्ट्रीट लाइट, क्षतिग्रस्त सड़कें और जलभराव पर तत्काल कार्रवाई की मांग
मनेन्द्रगढ़। नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली को लेकर नगर पालिका उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र पटवा ने मोर्चा खोलते हुए जिला कलेक्टर को पत्र सौंपा है। 1 सितंबर को दिए गए पत्र में उन्होंने वार्ड क्रमांक 1 से 22 तक जनहित से जुड़ी गंभीर समस्याओं का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।पत्र में उपाध्यक्ष ने बताया कि नगर के अधिकांश स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं, वहीं मरम्मत के लिए निकाली गई कई लाइटों को अब तक पुनः स्थापित नहीं किया गया है। इसके कारण कई इलाकों में रात के समय अंधेरा रहने की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने अंधेरे के कारण जंगली जानवरों, विशेषकर भालुओं के आबादी क्षेत्रों में विचरण बढ़ने से आमजन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।बारिश में सड़क और नालियों की स्थिति चिंताजनक उपाध्यक्ष ने पत्र में बारिश के दौरान नगर के विभिन्न वार्डों में सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और गहरे गड्ढे बनने का मुद्दा भी उठाया है।नालियों की स्थिति खराब होने से जलभराव की समस्या उत्पन्न होने तथा आवागमन और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही गई है। इससे नागरिकों में असंतोष बढ़ने का भी उल्लेख पत्र में किया गया है।पालिका के कामकाज पर भी सवाल पत्र में नगर पालिका के प्रशासनिक कामकाज को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि जनहित से जुड़े आवश्यक कार्यों के प्रति अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी के 4-5 दिनों तक मुख्यालय से अनुपस्थित रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इससे कार्यालयीन कार्यप्रणाली एवं विकास कार्यों की प्रगति प्रभावित हो रही है।कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग नगर पालिका उपाध्यक्ष ने कलेक्टर से मांग की है कि बंद स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत एवं पुनर्स्थापना, सड़कों के गड्ढों की मरम्मत तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था के लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।उपाध्यक्ष ने पत्र की प्रतिलिपि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मनेन्द्रगढ़ को भी प्रेषित की है। अब देखना होगा कि कलेक्टर स्तर से उठाए गए इन मुद्दों पर क्या कार्रवाई होती है और नगर की बुनियादी व्यवस्थाओं में कितना सुधार आता है।






