
मनेन्द्रगढ़। छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक बड़ा धमाका होने जा रहा है। जिला प्रशासन अब मनेंद्रगढ़ के सुप्रसिद्ध अमृतधारा जलप्रपात को देश के सबसे बड़े अंचलों के टक्कर का बनाने जा रहा है। बस्तर के विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात की तर्ज पर अब अमृतधारा में भी ‘नाइट कैंपिंग’ और ‘नाइट सफारी’ का रोमांच शुरू होने जा रहा है। यानी अब सैलानी सिर्फ दिन में ही नहीं, बल्कि रात के सन्नाटे में तारों की छांव तले दूधिया झरने की कलकल ध्वनि का आनंद ले सकेंगे।
“Experience Amritdhara Feel The Nature!!”— ग्लोबल ब्रांडिंग के साथ नए कलेवर में दिखेगा जलप्रपात
इस प्राकृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर चमकाने के लिए जिला प्रशासन ने एक बेहद कैची और आधुनिक टैगलाइन तैयार की है। अब इस पूरे क्षेत्र को “Experience Amritdhara Feel The Nature!!” के नारे के साथ प्रमोट किया जाएगा। उद्देश्य साफ है— देश-दुनिया के उन पर्यटकों को खींचना जो प्रकृति को बेहद करीब से महसूस करना चाहते हैं।
वीआईपी कल्चर को ‘बाय-बाय’: 30 मई को खुद हाथों में कुदाल और फावड़ा थामेंगे जिले के बड़े अफसर।
अमृतधारा के इस ऐतिहासिक कायाकल्प की शुरुआत किसी बंद कमरे की फाइलों से नहीं, बल्कि सीधे जमीन पर पसीना बहाकर होगी। आगामी 30 मई को अमृतधारा के तट पर एक नया इतिहास लिखा जाएगा। नवागत कलेक्टर संतन देवी जांगड़े, जिला पंचायत सीईओ अंकिता सोम और एसडीएम लिंगराज सिदार की अगुवाई में जिले के तमाम आला अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर खुद हाथों में फावड़ा-कुदाल थामेंगे और विशाल श्रमदान अभियान का शंखनाद करेंगे।
झरने की गूंज के बीच सजेगा ‘प्रशासनिक थिंक-टैंक’, तैयार होगा।
सुरक्षा और लग्जरी सुविधाओं का ब्लूप्रिंट 30 मई को केवल श्रमदान नहीं होगा, बल्कि झरने की सुरीली गूंज के बीच जिले के सभी नीति-निर्माताओं का एक बड़ा वैचारिक शिविर (Think-Tank) जुटेगा। इस महा-मंथन में अमृतधारा को इको-टूरिज्म का मॉडल बनाने, रात में रुकने वाले पर्यटकों की अचूक सुरक्षा व्यवस्था, हाई-टेक लाइटिंग और प्रीमियम टेंट स्टे (लग्जरी कैंपिंग) को लेकर भविष्य का रोडमैप फाइनल किया जाएगा।
मध्य प्रदेश, यूपी और झारखंड के पर्यटकों की बनेगा ‘फर्स्ट चॉइस’, स्थानीय रोजगार को मिलेंगे नए पंख।

अमृतधारा जलप्रपात भौगोलिक रूप से ऐसी जगह है जहां छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों— मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड के सैलानियों का हमेशा तांता लगा रहता है। अब तक लोग शाम होते ही लौट जाते थे, लेकिन नाइट कैंपिंग शुरू होने से यह क्षेत्र इन राज्यों के लिए ‘वीकेंड डेस्टिनेशन’ बन जाएगा। इस मास्टरप्लान से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय आदिवासियों और युवाओं के लिए गाइड, होम-स्टे और एडवेंचर स्पोर्ट्स के जरिए रोजगार की बाढ़ आ जाएगी।
मानसून की आहट से पहले प्रशासन का ‘मास्टरस्ट्रोक’, प्रकृति प्रेमियों के लिए इस बार कुछ बेहद खास है!

बारिश का मौसम शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और ठीक इसी समय प्रशासन का यह कदम अमृतधारा को देश के पर्यटन मानचित्र पर नई ऊंचाई देगा। पर्यावरण को बिना एक प्रतिशत नुकसान पहुंचाए (Eco-Toursim Guidelines के तहत) इस पूरे प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा जा रहा है। अगर आप भी प्रकृति प्रेमी हैं, तो इस मानसून में अमृतधारा का एक बिल्कुल नया, सुरक्षित और बेहद रोमांचक रूप आपका स्वागत करने के लिए तैयार है!




