एक हजार ग्रामीणों की जिंदगी बारिश में हो जाती है कैद, एक ही नदी को चार जगह पार करने की मजबूरी; पुल के लिए सरपंच-सचिव ने कलेक्टर से लेकर मंत्री तक लगाए कई बार गुहार*
*बुलंद मिडिया*
*जिला ब्यूरो दानी पाण्डेय*
सूरजपुर जिले के ब्लॉक मुख्यालय ओड़गी के दूरस्थ चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र में लगातार बारिश के चलते बरगा नदी एक बार फिर उफान पर है। नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्राम पंचायत रसौकी का संपर्क लगातार तीसरे दिन भी आसपास के क्षेत्रों से प्रभावित है। पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में गांव के करीब एक हजार ग्रामीणों को आवागमन से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार, डाक और सरकारी कामकाज तक कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि रसौकी पहुंचने और गांव से बाहर निकलने के लिए ग्रामीणों को एक ही बरगा नदी को करीब चार अलग-अलग स्थानों पर पार करना पड़ता है।
ग्राम पंचायत रसौकी की सरपंच रीता सिंह और सचिव देवनाथ सिंह के अनुसार बरगा नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार कलेक्टर को आवेदन दिया जा चुका है। इसके अलावा शिविरों के माध्यम से भी समस्या प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में लाई गई है। मंत्री को भी आवेदन देकर ग्रामीणों की समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
*रक्षाबंधन पर भी नदी बनी भाई-बहनों के मिलन में बाधा*
बरगा नदी के उफान का असर इस बार रक्षाबंधन के त्योहार पर भी पड़ा। रसौकी की कई बहनें अपने भाइयों के घर राखी बांधने नहीं पहुंच सकीं। वहीं दूसरे गांवों से रसौकी आने वाली बहनों को भी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण रास्ते में ही रुकना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस त्योहार पर भाई-बहन एक-दूसरे से मिलने के लिए दूर-दूर से आते हैं, उस दिन भी नदी ने रास्ता रोक दिया। कई परिवारों में रक्षाबंधन का उत्साह फीका पड़ गया। ग्रामीणों के मुताबिक यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि हर बारिश में पुल के अभाव में ऐसी स्थिति पैदा होती है।
*एक ही नदी को चार जगह पार करने की मजबूरी*
रसौकी के ग्रामीणों के लिए बरगा नदी पार करना रोजमर्रा की मजबूरी बन चुकी है। सामान्य मौसम में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही नदी का बहाव तेज हो जाता है। एक ही नदी को करीब चार स्थानों पर पार करना पड़ता है। जलस्तर बढ़ने के बाद यही रास्ते ग्रामीणों के लिए जान जोखिम में डालने वाले बन जाते हैं।
सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को होती है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कोई व्यक्ति जरूरी काम से बाहर जाए और इसी दौरान नदी का जलस्तर बढ़ जाए तो वापस लौटना मुश्किल हो जाता है।
*आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती*
नदी के उफान का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब होने, दुर्घटना होने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ने पर परिजनों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य बीमारी में भी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना कठिन हो जाता है। गंभीर मरीज, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चों के मामले में समय पर इलाज नहीं मिलने का खतरा और बढ़ जाता है।
*साप्ताहिक बाजार भी प्रभावित, जरूरी सामान के लिए इंतजार*
रसौकी का साप्ताहिक बाजार भी बरगा नदी के उफान से प्रभावित हुआ है। नदी पार कर गांव तक पहुंचने वाले व्यापारी और आसपास के ग्रामीण जलस्तर बढ़ने के कारण बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे बाजार की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के लिए भी नदी का पानी उतरने का इंतजार करना पड़ रहा है। आवागमन बाधित होने का सीधा असर स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
*डाक और सरकारी कामकाज भी ठप होने की स्थिति में*
नदी का जलस्तर बढ़ने से डाक सेवा और सरकारी कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, दस्तावेज, आवेदन और अन्य जरूरी सरकारी कार्यों के लिए बाहर जाना पड़ता है, लेकिन नदी का तेज बहाव उनके रास्ते में बाधा बन जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई जरूरी काम समय पर नहीं हो पाते। गांव का संपर्क टूटने से सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में भी परेशानी होती है।
*बीएसएनएल टावर बंद, संचार व्यवस्था भी प्रभावित*
बारिश के बीच रसौकी में लगा बीएसएनएल टावर बंद होने से मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी सामने आ रही है। एक ओर नदी उफान पर है और दूसरी ओर संचार व्यवस्था प्रभावित होने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
आपात स्थिति में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन या परिजनों से संपर्क करना भी कठिन हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ और आपदा जैसी स्थिति में मोबाइल नेटवर्क सबसे जरूरी होता है, लेकिन टावर बंद होने से यह सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
*एक हजार ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से हो रहे वंचित*
ग्राम पंचायत के अनुसार रसौकी में करीब एक हजार ग्रामीण रहते हैं, जिनकी रोजमर्रा की जिंदगी बरसात में बरगा नदी पर निर्भर हो जाती है। नदी में पानी बढ़ते ही गांव का संपर्क प्रभावित होने से लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पुल और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने पर समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। लेकिन वर्षों से पुल निर्माण की मांग के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से हर बरसात में वही संकट दोहराया जा रहा है।
*हर बारिश में टापू बन जाता है गांव*
ग्रामीणों के अनुसार बरगा नदी पर पुल नहीं होने से रसौकी बारिश के दिनों में लगभग टापू में तब्दील हो जाता है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से कट जाता है। इसका असर केवल आवागमन पर नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, डाक, सरकारी कामकाज और संचार व्यवस्था पर भी पड़ता है।
स्कूल जाने वाले बच्चों और जरूरी काम से बाहर जाने वाले ग्रामीणों को पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार जरूरी काम टालने की मजबूरी भी बन जाती है।
*कलेक्टर से लेकर मंत्री तक पहुंची शिकायत, अब स्थायी समाधान की मांग*
सरपंच रीता सिंह और सचिव देवनाथ सिंह का कहना है कि पंचायत की ओर से बरगा नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार आवेदन दिया गया है। कलेक्टर के समक्ष समस्या रखी गई है। शिविरों में भी ग्रामीणों की परेशानी बताई गई है और मंत्री को भी आवेदन देकर स्थायी पुल निर्माण की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरगा नदी पर पुल निर्माण होने से वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। पुल बनने से रसौकी का संपर्क पूरे साल बना रहेगा और स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार, डाक, सरकारी सेवाओं तथा संचार जैसी सुविधाओं तक ग्रामीणों की पहुंच आसान होगी।
*ग्रामीणों की मांग—अब आश्वासन नहीं, पुल का निर्माण हो*
लगातार तीसरे दिन बरगा नदी के उफान से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश में नदी के पानी के साथ उनकी जिंदगी भी रुक जाती है। रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर भी परिवार एक-दूसरे से नहीं मिल पाए, यह स्थिति बताती है कि पुल अब रसौकी के लिए सुविधा नहीं बल्कि जरूरत और सुरक्षा का सवाल बन चुका है।
फिलहाल बरगा नदी का बहाव तेज बना हुआ है और रसौकी का आवागमन सामान्य नहीं हो सका है। ग्रामीण नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी उम्मीद अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान करते हुए बरगा नदी पर जल्द पुल निर्माण की स्वीकृति और कार्यवाही करेगा।






