पुरानी खबर की खोज: सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को MCB जिले में लगा पलीता!

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रायपुर/मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB):आम जनता को राजस्व मामलों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया था। सरकार की मंशा थी कि ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को सीधे जमीनी स्तर पर उतारा जाए। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि MCB (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले में इस कड़े और जनहितैषी आदेश का पालन नहीं हो रहा है, जिससे जनता आज भी परेशान है।

क्या था सरकार का ‘मास्टरस्ट्रोक’ आदेश?

​पंचायत संचालनालय, छत्तीसगढ़ (नवा रायपुर) द्वारा जारी आदेश क्रमांक 571/2025/162 (दिनांक 25/07/2025) के अनुसार, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के तहत अब तक तहसीलदार के पास रहने वाली शक्तियों को अब सीधे ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है।

​इसके तहत:

  • अविवादित नामांतरण और बंटवारा (धारा 110, 178, 178-क, एवं 178-ख) के मामलों का निपटारा अब सीधे ग्राम पंचायतें करेंगी।
  • ​सचिवों और पटवारियों को ‘भुइयां पोर्टल’ तथा तकनीकी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देकर सीधे जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करने का निर्देश था।
  • ​कलेक्टरों को समय-सीमा की बैठक (TL) में इसकी नियमित समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद सचिवों से क्यों छीना गया अधिकार?

​राजस्व मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन ने यह महसूस किया कि ऑनलाइन प्रक्रिया होने के बावजूद भी आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे थे। भ्रष्टाचार और लेत-लतीफी को खत्म करने के लिए सचिवों के पुराने ढर्रे से अधिकार छीनकर, सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर इस व्यवस्था को लागू किया गया। मकसद साफ था—ग्रामीणों को अपने ही गांव में बिना किसी सिफारिश या घूस के हक मिल सके और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति सीधे आम जनता तक पहुंचे।

MCB जिले में आदेश की धज्जियां, कलेक्टर की समीक्षा पर सवाल!

​संचालक प्रियंका ऋषि महोबिया (भा.प्र.से.) के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश (जिसकी प्रतिलिपियां 1001410511.jpg और 1001410512.jpg में देखी जा सकती हैं) को जारी हुए लंबा समय बीत चुका है। इसके बावजूद MCB जिले में यह आदेश केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है।

बड़ा सवाल: जब आदेश में साफ लिखा है कि कलेक्टर नियमित रूप से इसकी समीक्षा करेंगे, तो फिर MCB जिले में प्रशासनिक सुस्ती क्यों है? क्यों आज भी ग्रामीण छोटे-छोटे नामांतरण के कामों के लिए तहसील कार्यालयों की दौड़ लगाने को मजबूर हैं?

सरकार की इस कल्याणकारी योजना को ठंडे बस्ते में डालना सीधे तौर पर उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद MCB जिला प्रशासन नींद से जागता है या जनता यूं ही परेशान होती रहेगी।

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