अंबिकापुर निगम की बैठक में 17 मुद्दों पर फैसला, केदारपुर की पुरानी पानी टंकी बनेगी जोनल कार्यालय; सामुदायिक भवनों से हर माह दो लाख की आय की तैयारी
अंबिकापुर। नगर निगम की जल व्यवस्था में लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ उपभोक्ताओं के घरों में पानी की सप्लाई नहीं पहुंची, लेकिन जल कर के बिल नियमित रूप से जारी होते रहे। देखते ही देखते बकाया राशि 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच गई। शिकायतों की जांच में करीब 7-8 मामले सही पाए गए, जिसके बाद पात्र उपभोक्ताओं को जल बिल में राहत देने का निर्णय लिया गया है।
सोमवार को महापौर मंजूषा भगत की अध्यक्षता में हुई नगर निगम की बैठक में शहर से जुड़े 17 मुद्दों पर चर्चा की गई। जल बिल की शिकायतों पर कमेटी से जांच कराई गई थी। जांच में जिन उपभोक्ताओं के घरों में पानी की सप्लाई नहीं पहुंचने की पुष्टि हुई, उनके बिल माफ करने पर सहमति बनी। हालांकि यह राहत जांच में शिकायत सही पाए जाने वाले मामलों तक सीमित रहेगी।
पुरानी पानी टंकी बनेगी जोनल कार्यालय
बैठक में निगम की सेवाओं को लोगों के नजदीक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। केदारपुर की पुरानी पानी टंकी के भवन को जोनल कार्यालय के रूप में उपयोग करने का फैसला किया गया है। इससे आसपास के नागरिकों को संपत्ति कर, समेकित कर, जल कर समेत निगम से संबंधित कार्यों के लिए मुख्य कार्यालय तक जाने की जरूरत कम होगी।
सामुदायिक भवनों से निगम की आय बढ़ाने की तैयारी
नगर निगम ने अपनी आय बढ़ाने के लिए बाबूपारा स्थित सामुदायिक भवन को विश्वविद्यालय और चांदमारी स्थित सामुदायिक भवन को समाज कल्याण विभाग को किराए पर देने का निर्णय लिया है। दोनों भवनों से निगम को करीब एक-एक लाख रुपये प्रतिमाह किराया मिलने की उम्मीद है।
स्वच्छता के लिए ब्रांड एंबेसडर और नुक्कड़ नाटक
शहर की सफाई व्यवस्था और जनजागरूकता को मजबूत करने के लिए समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों तथा विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय लोगों को स्वच्छता अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। इसके अलावा नुक्कड़ नाटक और अन्य जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को कचरा डस्टबिन में डालने और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
सेप्टिक टैंक सफाई शुल्क में 500 रुपये की बढ़ोतरी
बैठक में सेप्टिक टैंक सफाई शुल्क में 500 रुपये की वृद्धि करने का फैसला भी लिया गया। निगम के अनुसार लंबे समय से शुल्क में संशोधन नहीं हुआ था और बढ़ती लागत को देखते हुए शुल्क बढ़ाना जरूरी था। वहीं गांधी स्टेडियम परिसर स्थित मल्टीपरपज हॉल के विद्युत एवं सफाई शुल्क में भी बढ़ोतरी की जाएगी।
कुल मिलाकर बैठक में जनता को राहत देने के साथ निगम की आय बढ़ाने और व्यवस्थाओं को विकेंद्रीकृत करने पर जोर रहा। सबसे बड़ा सवाल उन उपभोक्ताओं के लिए बना हुआ था, जिनके नलों में पानी नहीं आया, लेकिन बिल लगातार आता रहा। जांच के बाद अब ऐसे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।






