दस साल बाद खुला जमीन रजिस्ट्री का ‘राज’, अब कलेक्टर से जांच की गुहार

Share this post:

सरपंची कार्यकाल में वृद्ध के भरोसे का फायदा उठाकर जमीन दूसरे नाम कराने का आरोप; पेंशन बनवाने के बहाने रजिस्ट्री कराने की बात, दीवानी मुकदमा लंबित फिर भी कब्जे की कार्रवाई पर सवाल

सीधी/टिकरी। टिकरी में जमीन विवाद अब केवल दो पक्षों के बीच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि पुरानी रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से वर्ष 2013-14 में हुई जमीन की रजिस्ट्री की संपूर्ण जांच कराने और जांच पूरी होने तक विवादित जमीन पर किसी भी तरह की कार्रवाई रोकने की मांग की है।पीड़ित परिवार का आरोप है कि सरपंची कार्यकाल के दौरान पर कूटरचित तरीके से जमीन की रजिस्ट्री दूसरे व्यक्ति के नाम करा दी गई। परिवार के मुताबिक वृद्ध राममनोहर पटवा को पेंशन बनवाने के नाम पर प्रक्रिया में शामिल किया गया और इसी दौरान जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई।

दस साल तक नहीं लगी भनक, रिकॉर्ड खुला तो पैरों तले खिसकी जमीन

परिवार का कहना है कि जिस जमीन को वे वर्षों से अपनी मानते रहे, उसके दूसरे व्यक्ति के नाम रजिस्टर्ड होने की जानकारी उन्हें करीब दस वर्ष बाद मिली। इसके बाद जब दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल की गई तो विवाद गहरा गया। परिवार अब यह जानना चाहता है कि आखिर रजिस्ट्री के समय जमीन के स्वामित्व से संबंधित कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे और पंजीयन किस आधार पर किया गया?

‘पेंशन’ के बहाने रजिस्ट्री का आरोप, जांच में सामने आ सकता है सच

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वृद्ध राममनोहर पटवा को पेंशन बनवाने की बात कहकर भरोसे में लिया गया और बाद में जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। यदि यह आरोप सही है तो मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में शामिल दस्तावेजों, पक्षकारों और गवाहों की भूमिका की जांच भी जरूरी हो जाएगी।

न्यायालय में दीवानी मामला लंबित, फिर भी कब्जे की कार्रवाई क्यों?

सबसे बड़ा सवाल अब प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। पीड़ित परिवार के अनुसार जमीन को लेकर दीवानी मामला न्यायालय में लंबित है, इसके बावजूद कब्जे से संबंधित कार्रवाई की गई। परिवार का कहना है कि जब स्वामित्व का विवाद न्यायालय में विचाराधीन है तो प्रशासन को पूरे रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कलेक्टर कराएं ‘रजिस्ट्री से राजस्व रिकॉर्ड’ तक जांच

पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से मांग की है कि वर्ष 2013-14 की संबंधित रजिस्ट्री की रजिस्ट्री कार्यालय से लेकर तहसील और राजस्व रिकॉर्ड तक पूरी कड़ी की जांच कराई जाए। रजिस्ट्री में प्रस्तुत दस्तावेज, पहचान संबंधी रिकॉर्ड, गवाह, हस्ताक्षर/अंगूठा निशान, पंजीयन की प्रक्रिया और बाद में राजस्व रिकॉर्ड में हुए नामांतरण की भी जांच हो।परिवार का कहना है कि निष्पक्ष जांच ही इस विवाद की असली तस्वीर सामने ला सकती है। यदि जांच में दस्तावेजों में कूटरचना अथवा नियम विरुद्ध प्रक्रिया सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

अब कलेक्टर के आदेश पर टिकी नजर

दस साल पुराने इस मामले में पीड़ित परिवार की मांग साफ है—पहले रिकॉर्ड की जांच हो, रजिस्ट्री की सच्चाई सामने आए और फिर आगे की कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन पुराने दस्तावेजों की परतें खोलकर मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देता है या जमीन विवाद एक बार फिर लंबी कानूनी लड़ाई में उलझा रहता है।

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

खबरें और भी हैं...

Advertisement Box

लाइव क्रिकट स्कोर

Gold and Silver price

मौसम अपडेट

राशिफल

© 2026 Chhattisgarh Dabang News  – All rights reserved. | News Website Development Services | New Traffic tail

0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x