कोरिया स्वास्थ्य विभाग में ‘सेटिंग’ का खेल? स्थानीय छुटभैया नेताओं के संरक्षण से हौसले बुलंद होने के आरोप
कोरिया। जिले के स्वास्थ्य विभाग में नियम-कायदों और विभागीय व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। मलाईदार पदों पर तैनाती और जिम्मेदारियों के बंटवारे में सेटिंग का खेल होने के आरोपों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिया है।
सबसे ज्यादा चर्चा सुनील सोनी को लेकर है। आरोप है कि चौकीदार पद से सीधे लेखापाल की जिम्मेदारी तक पहुंचने का उनका सफर विभागीय प्रक्रिया और पात्रता के लिहाज से जांच का विषय है। सवाल उठ रहा है कि आखिर किस नियम और किस आदेश के तहत उन्हें लेखापाल की जिम्मेदारी सौंपी गई? क्या इसके लिए निर्धारित योग्यता, पद संरचना और विभागीय प्रक्रिया का पालन किया गया?
छुटभैया नेताओं का संरक्षण या विभागीय मेहरबानी?
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ छुटभैया नेताओं के संरक्षण के चलते प्रभारी लेखापाल के हौसले बुलंद हैं। चर्चा यह भी है कि राजनीतिक पहुंच के दम पर विभागीय व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, लेकिन यदि ऐसा है तो यह स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है।
मूल कर्तव्य पीछे, मलाईदार जिम्मेदारियां आगे!
विभाग में कुछ कर्मचारियों के लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थानों पर बने रहने और अपने मूल कर्तव्यों से इतर जिम्मेदारियां संभालने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि जहां सामान्य कर्मचारी नियम और आदेशों के बीच काम करने को मजबूर हैं, वहीं प्रभावशाली कर्मचारियों को कथित तौर पर पसंदीदा जिम्मेदारियां मिल रही हैं।
यदि चौकीदार से लेखापाल की जिम्मेदारी तक पहुंचने की प्रक्रिया नियमानुसार हुई है तो विभाग को संबंधित आदेश, पद की स्वीकृति, योग्यता, सेवा विवरण और नियुक्ति/पदस्थापना की प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए। इससे सवालों पर स्वतः विराम लग सकता है।
जांच हुई तो खुल सकती है ‘सेटिंग’ की पूरी परत
मामले में केवल एक कर्मचारी की जिम्मेदारी का सवाल नहीं है, बल्कि यह जांच का विषय है कि किस अधिकारी ने जिम्मेदारी सौंपी, किस आधार पर सौंपी और क्या विभागीय नियमों का पालन हुआ। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं। क्या विभाग दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की जांच कराएगा या फिर ‘सेटिंग’ के आरोपों की चर्चा यूं ही चलती रहेगी? कोरिया की स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए इन सवालों का स्पष्ट जवाब जरूरी है।





