नौनिहालों के सिर पर मंडरा रहा खतरा, बदहाल आंगनबाड़ी पर प्रशासन की चुप्पी!

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उजियारपुर के आंगनबाड़ी केंद्र की जर्जर हालत ने खोली सरकारी दावों की पोल, दरकती दीवारों और सीलन के बीच जमीन पर बैठकर पढ़ रहे मासूम

मनेन्द्रगढ़। एक ओर सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए नौनिहालों को पोषण, शिक्षा और सुरक्षित माहौल देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं उजियारपुर का आंगनबाड़ी केंद्र इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवालिया निशान लगा रहा है। यहां मासूम बच्चों को ऐसे भवन में बैठाया जा रहा है, जिसकी दीवारें और छत खुद बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं।केंद्र की तस्वीरें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि नौनिहालों के लिए बनाए गए इस केंद्र की हालत कितनी चिंताजनक है। छत पर सीलन के निशान, जगह-जगह दरारें, उखड़ता प्लास्टर और जर्जर दीवारें बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। वहीं बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था का अभाव भी साफ दिखाई देता है। मासूम जमीन पर बैठकर पढ़ने और गतिविधियों में शामिल होने को मजबूर हैं।

शिकायतें फाइलों में, समस्या जमीन पर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी और निरीक्षण की व्यवस्था है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस बदहाल भवन पर अब तक क्यों नहीं पड़ी? उपलब्ध दस्तावेजों से पता चलता है कि केंद्र की मूलभूत जरूरतों को लेकर आवेदन भी दिया गया है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।सरकारी योजनाओं में बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर जोर दिया जाता है, लेकिन यदि बच्चों को सुरक्षित भवन तक उपलब्ध नहीं कराया जा सके तो इन योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।

हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

जर्जर भवन में रोजाना छोटे-छोटे बच्चों की मौजूदगी अपने आप में गंभीर विषय है। बरसात के मौसम में सीलन और कमजोर निर्माण की स्थिति और भी चिंता बढ़ाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन किसी अप्रिय घटना का इंतजार कर रहा है?ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर भवन की तकनीकी जांच कराएं, तत्काल मरम्मत कराएं और बच्चों के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराएं।

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर

उजियारपुर का यह आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ एक भवन की बदहाली नहीं दिखा रहा, बल्कि व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़ा कर रहा है। जब तस्वीरों में बदहाल भवन और जमीन पर बैठे बच्चे नजर आ रहे हों, तब जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।नौनिहालों की सुरक्षा कोई प्रयोग का विषय नहीं है। प्रशासन को तय करना होगा—पहले व्यवस्था सुधरेगी या फिर किसी हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने की कवायद शुरू होगी?

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