पद का दुरूपयोग कर भरे वर्षात में बुलडोजर लगाकर गिरवाया निर्माणाधीन आवास।
सीधी/टिकरी:- दरअसल मामला सीधी जिले के मझौली थाना अंतर्गत उप तहसील मड़वास के टिकरी ग्राम पंचायत का है जहां भरी बरसात में कब्जा दिलाने के लिए तहसीलदार ने नियम कायदों को दर किनार करते हुए न्यायालय में चल रहे मामले का उल्लंघन करते हुए या यूं कहे न्यायालय का ही उल्लंघन कर पूर्व सरपंच टिकरी सरोज साकेत की साठगांठ और पैसों के दम पर यह कार्यवाही को अंजाम दिया किंतु सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या तहसील दार को एक पक्षीय कार्यवाही करने का अधिकार किसने दिया और किस अधिकार के कारण पीड़ित परिवार राजकुमार पटवा/प्रदीप कुमार पटवा के कब्जे की जमीन पर बुलडोजर चलवाकर निर्माणाधीन घर को जमींदोज कर दिया गया।
विश्वस्त सूत्रों के जानकारी अनुसार राजस्व विभाग में भू माफियाओं और जमीन दलालों का बोलबाला।
विश्वस्त सूत्रों की माने तो इस बड़ी कार्यवाही में साठगांठ और कमिशन खोरी का मामला भी सामने आया है पीड़ित का आरोप है कि पूर्व सरपंच सरोज साकेत के साथ मिलकर इस व्यवहार न्यायालय में चल रहे मामले को तहसील दार ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए बेदखली का आदेश पारित कर स्वयं के पद का रौब दिखाकर स्वयं खड़े होकर यह कार्यवाही को अंजाम दिया मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 -14 में रखवा क्रमांक 572 एवं अंश भूमि 572/1 एवं 572/2 की सिंचित भूमि लगभग 1 एकड़ जमीन को सरोज साकेत सरपंच द्वारा मानसिक रूप से विक्षिप्त राममनोहर पटवा उम्र लगभग 75 वर्ष से जमीन की रजिस्ट्री कूटरचित तरीके से सरपंची पद का दुरूपयोग कर अपने सरपंची कार्यकाल में अपने नाम करा लिया किंतु सबसे बड़ा सवाल यहां कड़ा हो रहा है कि इस रजिस्ट्री की जानकारी पीड़ित परिवार को वर्षों तक जानकारी नहीं दी गई या ये बोले सालों तक पीड़ित को अंधकार में रखा गया।
भरी वर्षात में तहसील दार द्वारा विलेदखाली की कार्यवाही पर बड़ा सवाल करते हुए मामला सीधी कलेक्टर तक न्याय की गुहार।
न्यायालय में लंबित जमीन मामले में बुलडोजर कार्रवाही पर बेघर पीड़ित परिवार ने सीधी कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई और निर्माणाधीन घर को गिराये जाने पर उचित कड़ी कार्यवाही और मुआवजे की मांग की है अभी लगातार मूसलाधार बारिश के इस मौसम में इस प्रकार की कार्यवाही सवालों के घेरे में पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है पीड़ित परिवार के अनुसार संबंधित भूमि रकबा क्रमांक 572 लगभग 1 एकड़ जमीन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 ते की गई है मामले में न्यायालय में केस लंबित होने के बावजूद की गई इस कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं इसी सवालों को पीड़ित परिवार ने कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है।
प्रशासनिक बर्बरता और मरती संवेदनाएं।
बारिश के भीषण बौछारों के बीच किसी गरीब का घर उजाड़ देना केवल पत्थरों और ईंटों का ढांचा गिराना नहीं,बल्कि यह न्याय की अवधारणा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।सीधी जिले के ग्राम टिकरी में जिस तरह से पीड़ित परिवार के पुस्तैनी जमीन और प्रधान मंत्री आवास योजना के निर्माणाधीन घर पर जेसीबी चलाई गई,इस प्रकार की कार्यवाही सीधे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर और काले धब्बे जैसा सवाल खड़ा करती नजर आ रही है।जब यह मामला व्यवहार न्यायालय मझोली में विचाराधीन था और अगली पेशी की तिथि निर्धारित थी तक आखिर किस दबाव या जल्दबाजी में तहसीलदार ने यह ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की।यदि तहसीलदार (प्रशासन) साहब को भूमि पर से कब्जा हटाना ही अनिवार्य लग रहा था तो क्या मूसलाधार बारिश का मौसम ही इसके लिए चुना जाना उचित था या यूं कहें पूर्व सरपंच के दबाव में एक पक्षीय कार्यवाही को अंजाम दिया गया।





