बस स्टैंड के समीप बन रहा हाईटेक लाइब्रेरी परिसर; मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रखी गई थी नींव, अब निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवा
बैकुंठपुर। युवाओं को आधुनिक अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बस स्टैंड के समीप निर्माणाधीन नालंदा परिसर/हाईटेक लाइब्रेरी अब अपनी निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की नींव जिस उद्देश्य से रखी गई थी, उसके विपरीत निर्माण स्थल से सामने आ रही तस्वीरें जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।इस परियोजना को युवाओं के लिए अत्याधुनिक डिजिटल लर्निंग हब के रूप में विकसित किया जाना है। मुख्यमंत्री द्वारा इसकी नींव रखे जाने के बाद जिले में उम्मीद जगी थी कि बैकुंठपुर के विद्यार्थियों को आधुनिक और बेहतर अध्ययन का बड़ा केंद्र मिलेगा। लेकिन निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने पूरे प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीम-पिलर की गुणवत्ता पर सवाल, मानकों की जांच जरूरी
निर्माण स्थल को लेकर स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बीम और पिलर जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों में निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया जा रहा। सीमेंट, गिट्टी और कंक्रीट के अनुपात से लेकर सरियों की मोटाई एवं इस्तेमाल तक पर सवाल उठ रहे हैं।हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता तकनीकी जांच और निर्माण सामग्री के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकती है, लेकिन जिस तरह निर्माणाधीन भवन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं, उससे संबंधित विभाग के लिए मौके पर निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण कराना जरूरी हो गया है।
मजदूरों की सुरक्षा भी सवालों के घेरे में
निर्माण स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा बेल्ट, हेलमेट, सेफ्टी शूज और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दुर्घटना की स्थिति में प्राथमिक उपचार और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर भी स्पष्टता की मांग की जा रही है।करोड़ों की लागत से बनने वाले भवन में यदि निर्माण के साथ श्रमिक सुरक्षा की अनदेखी हुई तो यह विभागीय निगरानी की गंभीर चूक मानी जाएगी।
ठेकेदार की मनमानी या विभागीय निगरानी की कमी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर निर्माण स्थल पर गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है? क्या नियमित रूप से विभागीय इंजीनियर निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे हैं? इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने लिए जा रहे हैं या नहीं? और निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं?यदि निर्माण एजेंसी द्वारा निर्धारित मापदंडों से हटकर काम किया जा रहा है तो जिम्मेदार इंजीनियरों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। वहीं यदि सभी निर्माण कार्य नियमों के अनुसार हो रहे हैं तो विभाग को सार्वजनिक रूप से गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री की पहल, अब निगरानी पर सवाल
नालंदा परिसर केवल एक भवन नहीं, बल्कि बैकुंठपुर के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भविष्य की महत्वपूर्ण सुविधा के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री की पहल से शुरू हुई इस परियोजना में यदि निर्माण स्तर पर ही सवाल खड़े होते हैं तो यह शासन की मंशा पर नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर परियोजना की निगरानी और क्रियान्वयन व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।स्थानीय नागरिकों और युवाओं ने मांग की है कि निर्माणाधीन नालंदा परिसर का स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, बीम-पिलर व इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री के नमूने लेकर गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए और श्रमिक सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाए। जांच में अनियमितता सामने आने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात यह है कि करोड़ों की इस परियोजना में उठे सवालों पर विभाग केवल सफाई देता है या मौके पर तकनीकी जांच कराकर सच सामने लाता है।





