देवती डांड-कचोहर के जंगलों में वन संपदा पर माफिया की नजर, मैदानी अमले की निगरानी पर उठे सवाल
बैकुंठपुर। बैकुंठपुर वन मंडल के देवगढ़ वन परिक्षेत्र में लोध छाल के अवैध संग्रहण और तस्करी की शिकायतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देवती डांड और कचोहर के जंगलों में बड़े पैमाने पर लोध छाल निकाले जाने की जानकारी सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि वन क्षेत्र से छाल निकालकर उसे अवैध रूप से बाहर भेजने का सिलसिला लगातार जारी है।बताया जा रहा है कि पैसों का लालच देकर बड़ी संख्या में ग्रामीणों को जंगल से लोध छाल निकालने के काम में लगाया जा रहा है। स्थानीय सूत्र करीब 50 ग्रामीणों के इस गतिविधि से जुड़े होने की बात कह रहे हैं। यदि यह जानकारी जांच में सही पाई जाती है तो यह केवल वन संपदा के दोहन का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क की जांच का विषय बन जाता है।
दुर्गेश-दीपक की भूमिका पर उठे सवाल
अस्थानीय सूत्रों के अनुसार दुर्गेश और दीपक नामक दो लोगों की भूमिका इस अवैध कारोबार के संचालन में बताई जा रही है। हालांकि, ऐसे में वन विभाग के लिए जरूरी है कि मौके पर जांच कर यह पता लगाया जाए कि लोध छाल किसके माध्यम से एकत्र की जा रही है, इसका संग्रहण कहां हो रहा है और इसे आगे कहां भेजा जा रहा है।
बीट गार्ड और फॉरेस्टर की निगरानी पर सवाल
देवती डांड और कचोहर वन क्षेत्रों में यदि लगातार वन उपज का अवैध संग्रहण हो रहा है तो सबसे बड़ा सवाल विभाग की मैदानी निगरानी व्यवस्था पर उठता है। ग्रामीणों की इतनी बड़ी संख्या जंगल में सक्रिय हो और वन अमले को इसकी जानकारी न हो, यह स्थिति विभागीय गश्ती और मॉनिटरिंग व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।
रेंजर की भूमिका भी जांच के घेरे में
वन परिक्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और अधीनस्थ अमले की निगरानी की जिम्मेदारी रेंजर की होती है। ऐसे में लोध छाल की तस्करी संबंधी शिकायतें सही पाई जाती हैं तो देवगढ़ रेंजर की निगरानी व्यवस्था और संबंधित बीट गार्ड व फॉरेस्टर की कार्यप्रणाली की भी जांच जरूरी होगी।





