निमंत्रण देकर बुलाया, फिर बैठने तक की व्यवस्था नहीं—जिला प्रशासन और जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
बैकुंठपुर, कोरिया। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर बुजुर्गों के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रशासन की बदइंतजामी और संवेदनहीनता खुलकर सामने आई। एक ओर मंच पर बुजुर्गों के सम्मान और गरिमा की बातें होती रहीं, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम की कवरेज के लिए बाकायदा निमंत्रण देकर बुलाए गए पत्रकारों के लिए बैठने तक की व्यवस्था नहीं की गई।जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के मिनी स्टेडियम में समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए बैठने की पर्याप्त व्यवस्था थी, लेकिन पत्रकारों को पूरे कार्यक्रम के दौरान खड़े होकर कवरेज करनी पड़ी।
निमंत्रण देकर बुलाया, फिर कर दिया नजरअंदाज
जब प्रशासन और आयोजन समिति को पत्रकारों की मौजूदगी चाहिए थी, तो उन्हें बाकायदा आमंत्रित किया गया। लेकिन कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद पत्रकारों के लिए एक कुर्सी तक उपलब्ध नहीं कराई गई।सवाल यह है कि निमंत्रण पत्र भेजने से पहले क्या जिला प्रशासन और जनसंपर्क विभाग ने यह सुनिश्चित नहीं किया कि कार्यक्रम में आमंत्रित पत्रकारों के लिए मूलभूत व्यवस्था मौजूद है?
वीआईपी मेहमानों के लिए कुर्सियां और सोफे लगाए जा सकते हैं, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए व्यवस्थाएं की जा सकती हैं, लेकिन समाचार संकलन के लिए बुलाए गए पत्रकारों के लिए बैठने की जगह तक नहीं—यह प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में
इस पूरे मामले में जिला जनसंपर्क विभाग की भूमिका भी सीधे सवालों के घेरे में है। मीडिया को कार्यक्रम में आमंत्रित करने के बाद पत्रकारों के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी थी?यदि जनसंपर्क विभाग पत्रकारों को कार्यक्रम में बुलाता है, तो क्या उसकी जिम्मेदारी केवल निमंत्रण भेजने तक सीमित है? क्या कार्यक्रम स्थल पर मीडिया के लिए बैठने, कवरेज और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?
निमंत्रण देना और फिर आमंत्रित पत्रकारों को खड़े रहने के लिए मजबूर करना आखिर किस तरह का मीडिया प्रोटोकॉल है?
बुजुर्गों के सम्मान के कार्यक्रम में व्यवस्था की बेइज्जती!
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस कार्यक्रम का उद्देश्य ही सम्मान, संवेदना और गरिमा का संदेश देना था, उसी कार्यक्रम में पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार तक नहीं किया गया।प्रशासन मंच से बुजुर्गों को सम्मानित करता रहा और बाहर व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी यह तक सुनिश्चित नहीं कर सके कि कार्यक्रम को कवर करने पहुंचे पत्रकारों को बैठने के लिए कुर्सियां मिल सकें।यह महज अव्यवस्था नहीं, बल्कि आयोजन की तैयारियों और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल है।
अब जवाब दे जिला प्रशासन
स्थानीय पत्रकारों में इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी है। उनका सवाल है कि जब पत्रकारों को आमंत्रित किया गया था, तो उनके लिए बैठने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई
पत्रकारों को निमंत्रण किसके निर्देश पर दिया गया?
मीडिया के लिए बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी?
कार्यक्रम शुरू होने से पहले व्यवस्थाओं का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया?
वीआईपी के लिए व्यवस्था थी तो पत्रकारों के लिए कुर्सियां क्यों नहीं थीं?
क्या मीडिया को सिर्फ फोटो और कवरेज के लिए बुलाना ही प्रशासन की नजर में पत्रकारों का सम्मान है?
बैकुंठपुर के इस आयोजन ने जिला प्रशासन और जनसंपर्क विभाग की मीडिया व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी इस चूक की जवाबदेही तय करें और बताएं कि आमंत्रित पत्रकारों को कार्यक्रम के दौरान खड़े रहने की नौबत आखिर क्यों आई।
बुजुर्गों के सम्मान का संदेश देने वाले कार्यक्रम में पत्रकारों के सम्मान की कुर्सी आखिर किसने छीन ली?





